Ghosi By Election: घोसी के चुनाव नतीजे ओमप्रकाश राजभर के लिए क्यों हैं बड़ा झटका?
2024 में होने वाले आम चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर को एक बड़ा झटका लगा है। पूर्वांचल में पिछड़ों का नेता होने का दंभ भरने वाले राजभर को घोसी की हार से बड़ा झटका लग सकता है।
UP Ghosi Bypoll: देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासत करवट लेती दिख रही है। पहले खतौली विधानसभा का उपचुनाव हारने के बाद अब मऊ जिले की घोसी सीट पर भी बीजेपी की हार हुई है। घोसी उपचुनाव का चुनावी नतीजा 2024 से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के चीफ ओम प्रकाश राजभर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकते हैं।

सपा ने बीजेपी को बड़े अंतर से हराया
सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह ने बीजेपी के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को 42,672 वोटों से हरा दिया है। सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को 124295 वोट मिले जबकि BJP प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को 81623 वोट हासिल हुए। 34 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद सुधाकर सिंह की जीत हुई है। पूर्वांचल में सपा को मिली ये जीत 2024 के आम चुनाव से पहले उसके लिए बूस्टर डोज का काम करेगी।
घोसी की हार के बाद घटेगा राजभर का कद
जानकारों का कहना है कि घोसी की हार से सबसे ज्यादा फर्क ओम प्रकाश राजभर की राजनीति पर पड़ेगा। जिस तरह से 2024 के लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग पर राजभर का कद घटेगा और वह सीटों की बारगेनिंग उस तरह से नहीं कर पाएंगे जिस तरह से पहले किया करते थे। घोसी सीट पर राजभरों की अच्छी खासी संख्या है जिसकी वजह से बीजेपी को जिताने का दारोमदार राजभर भी था लेकिन वह इस बार फेल साबित हुए हैं।
पूर्वांचल की राजनीति में पकड़ ढ़ीली
पूर्वांचल की पिछड़ी जाति पर मजबूत पकड़ का दावा करने वाले ओमप्रकाश राजभर की यूपी में भी भूमिका घटेगी। जिस तरह से वो दावा कर रहे थे कि यूपी के पूर्वांचल में बनारस से लेकर देवरिया तक दर्जनभर सीटों पर राजभर जीत हार तय कर सकते हैं। लेकिन घोसी के नतीजे उनके लिए बड़ा सबक होगा। बीजेपी के खेमे में भी राजभर की अहमियत पहले से कम हो जाएगी। पूर्वांचल में गाजीपुर, बनारस, बलिया, आजमगढ़ समेत दर्जन भर लोकसभा क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ है।
घोसी में हार जीत का गठबंधन पर असर नहीं
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो घोसी के नतीजे राजभर के लिए बड़ा झटका जरूर हैं लेकिन इससे बीजेपी के साथ उनके रिश्तों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बीजेपी को 2024 में राजभर की जरूरत है और वह नहीं चाहेंगे कि एक जीत हार से इस गठबंधन पर कोई असर पड़े। बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व इसीलिए राजभर को इतना महत्व दे रहा है कि 2024 में वह बीजेपी के लिए कारगर साबित हो सकते हैं।
राजभरों ने भी नहीं दिया ओपी राजभर का साथ?
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि,
घोसी में बीजेपी की हार के बाद अब सवाल ये है कि अपने आपको राजभरों का बड़ा नेता कहने वाले ओम प्रकाश राजभर की क्या अब अपने समुदाय में पकड़ नहीं रही। क्या वो अब वोट ट्रांसफर कराने वाले नेता नहीं रहे क्योंकि बीजेपी उनके साथ मिलकर लड़े इस चुनाव के बारे में मंथन जरूर करेगी। सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि इस हार के बाद क्या अब बीजेपी के संभावित विस्तार में राजभर को जगह मिलेगी या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।












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