सहारनपुर जातीय दंगा: भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर गिरफ्तार

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर सहारनपुर में हुए जातीय बवाल मामले में मुख्य आरोपी हैं। उनको दलित नेता के घर से हिमाचल प्रदेश में गिरफ्तार किया गया है।

सहारनपुर। पिछले दिनों सहारनपुर जनपद में विभिन्न स्थानों पर हुए जातीय दंगे और पुलिस पर किए गए पथराव व फायरिंग के मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए भीम आर्मी के संस्थापक अधिवक्ता चंद्रशेखर आजाद को गुरुवार को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई यूपी और हिमाचल प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रूप से की है। हलांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक चंद्रशेखर आजाद की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हो सकी है।

5 मई के बाद सहारनपुर में भड़का बवाल

5 मई के बाद सहारनपुर में भड़का बवाल

ज्ञात हो कि विगत 5 मई को सहारनपुर के बड़गांव थाना क्षेत्र के गांव शब्बीरपुर में दलित और ठाकुरों के बीच जातीय संघर्ष हो गया था। इसके बाद 9 मई को भीम आर्मी एकता मिशन के कार्यकर्ता 5 मई के दंगे में पकड़े गए दलितों की रिहाई की मांग को लेकर शहर के गांधी पार्क में एक सभा आयोजित करने जा रहे थे लेकिन प्रशासन ने इस सभा की अनुमति नहीं दी थी। फिर गांधी पार्क में शांतिपूर्वक धरना दे रहे दलित युवकों को हिरासत में लिया था। इन युवकों को हिरासत से रिहा करने पर गांव रामनगर में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इन युवाओं को जब पुलिस रोकने गई तो आरोप है कि दलितों और पुलिस के बीच जमकर बवाल हुआ था, जिसमें करीब दो दर्जन वाहनों को आग लगा दी गई थी।

चंद्रशेखर बवाल के बाद हुआ फरार

चंद्रशेखर बवाल के बाद हुआ फरार

इसके बाद से चंद्रशेखर फरार चल रहा था। 23 मई को गांव शब्बीरपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती गईं तो उनके वापस लौटने पर बलवाइयों ने एक दलित की हत्या कर दी थी और सात को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

चंद्रशेखर के भाई की पहले हो चुकी है गिरफ्तारी

चंद्रशेखर के भाई की पहले हो चुकी है गिरफ्तारी

तभी से सहारनपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की कई टीम चंद्रशेखर आजाद की गिरफ्तारी के लिए न केवल आसपास के जनपद बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी चंद्रशेखर की तलाश कर रही थी। चंद्रशेखर के भाई कमल किशोर को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

दलित नेता के घर में छुपे थे चंद्रशेखर

दलित नेता के घर में छुपे थे चंद्रशेखर

पुलिस को चंद्रशेखर की लोकेशन पंजाब और हिमाचल प्रदेश में मिल रही थी, जिसके बाद कई दिनों से सहारनपुर पुलिस हिमाचल प्रदेश में डेरा डाले हुए थी। गुरुवार को हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चंद्रशेखर को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी नामक स्थान से गिरफ्तार कर लिया है। यहां पर चंद्रशेखर एक दलित नेता के यहां शरण लिए हुए था। हालांकि इस बाबत एसएसपी से वार्ता का प्रयास किया गया, लेकिन न तो एसएसपी और न ही डीएम कॉल रिसीव कर रहे हैं।

चंद्रशेखर ने पुलिस को खूब छकाया

चंद्रशेखर ने पुलिस को खूब छकाया

सहारनपुर दंगे में मुख्य आरोपी बनाए गए भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने यूपी पुलिस को जमकर छकाया। पुलिस उसके पीछे पीछे रही और वह पुलिस के आगे आगे रहा, लेकिन पुलिस उस पर हाथ नहीं डाल सकी, जबकि वह सोशल मीडिया के माध्यम से रोजाना ही अपनी वीडियो वायरल करा था। हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से पहले चंद्रशेखर आजाद पंजाब के होशियारपुर में एक दलित के यहां रहा। देर रात ही वह होशियारपुर से डलहौजी पहुंचा था। इससे पूर्व वह जालंधर में भी रहा, जहां एक दलित नेता ने एक चैनल के पत्रकार से बाकायदा उसका इंटरव्यू भी करवाया। इंटेलीजेंस को इस बात की खबर भी नहीं लगने दी कि आजाद ने पंजाब में पनाह ली है।अब इंटरव्यू करवाने वाला दलित नेता भी अंडरग्राउंड बताया जा रहा है। होशियारपुर-जालंधर रोड पर ही किसी दलित के घर पर आजाद से चैनल ने बात की। यह गुप्त रखा गया कि यह कौन सा एरिया है। चैनल को ही आजाद ने बताया था कि अब वह पुणे जा रहा है।

टीवी को इंटरव्यू देता रहा चंद्रशेखर

टीवी को इंटरव्यू देता रहा चंद्रशेखर

टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में आजाद ने कहा कि अगर पुलिस 37 निर्दोषों को जमानत पर रिहा कर दे तो वह आत्मसमर्पण करने को तैयार है। पेशे से वकील आजाद ने कहा, आप नीची जाति से संबंधित है और अपने हक की आवाज उठाते हैं तो पुलिस और सरकार के लिए वांछित हो जाते हैं। ऐसा पहले भी होता आया है। दलित हक की आवाज उठाता है तो वह पुलिस के लिए वांटेड हो जाता है या फिर नक्सली हो जाता है। उसे यूपी पुलिस ढ़ूंढ रही है, जिन लोगों ने दलितों पर अत्याचार किया, उन पर क्यों कार्रवाई नहीं हुई। जितनी भी घटनाएं हुई, उनमें दलितों को ही निशाना बनाया गया है। दलितों ने अपनी रक्षा के लिए भीम आर्मी बनाई गई है। आर्मी का गठन आजाद ने ही किया था, अब सात राज्यों में इसकी शाखाएं हैं। जब भी कोई घटना होती है, भीम आर्मी को निशाना बनाया जाता है। घटना के बाद बेकूसर दलितों को जेलों में डाला जा रहा है।

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