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यूपी के मिल्कीपुर में उपचुनाव की संभावनाएं हुई तेज, पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने वापस लेंगे हाईकोर्ट याचिका

Uttar Pradesh By-Election: उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना अब और अधिक प्रबल हो गई है। क्योंकि पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को वापस लेने की मंशा जाहिर की है। बाबा गोरखनाथ की यह याचिका 2022 के आम चुनावों में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद की जीत को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। उनके इस कदम ने मिल्कीपुर में आगामी चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। गोरखनाथ के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने बताया कि चुनाव रद्द करने का मामला अब खत्म हो गया है। हम जल्द ही याचिका वापस लेने जा रहे हैं।

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    यूपी के मिल्कीपुर में उपचुनाव की संभावनाएं तेज,पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ वापस लेंगे हाईकोर्ट याचिका

    इस मामले को लेकर बीजेपी के पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ का भी बयान सामने आया है। मिल्कीपुर विधानसभा को लेकर दायर याचिका को लेकर बाबा गोरखनाथ का कहना है कि जब कोई विधानसभा चुनाव लड़ता है तो उसके सभी दस्तावेज नोटरीकृत होते हैं। जिस वकील से अवधेश सिंह नोटरी ली थी।उसका लाइसेंस 6 साल पहले निरस्त हो गया था। सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। कल हम चुनाव आयोग के फैसले से नाराज थे। इसलिए हमने याचिका वापस लेने का फैसला किया। ताकि चुनाव हो सकें और जनता सफर न करें।

    baba gorakhnath

    चुनाव आयोग की घोषणा और मिल्कीपुर की स्थिति

    गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की नौ अन्य विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की तारीखें पहले ही घोषित कर दी हैं। इन सीटों पर 13 नवंबर को मतदान और 23 नवंबर को मतगणना होगी। हालांकि मिल्कीपुर सीट को इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया था। जिसका कारण गोरखनाथ की लंबित याचिका थी। अब याचिका वापस लेने की स्थिति में उपचुनाव का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।

    अवधेश प्रसाद की जीत और गोरखनाथ का कदम

    अवधेश प्रसाद की हालिया लोकसभा चुनाव में जीत और उनके सांसद के रूप में पदभार संभालने के बाद गोरखनाथ के इस कानूनी फैसले ने मिल्कीपुर में चुनावी गतिविधियों की नई दिशा तय कर दी है। गोरखनाथ के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि हम जल्द ही मामला वापस लेकर चुनाव आयोग को इसकी सूचना देंगे। ताकि उपचुनाव जल्द से जल्द हो सकें।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति और मिल्कीपुर का महत्व

    राज्य में राजनीतिक दांव-पेच की स्थिति तब और तीव्र हो गई है। जब समाजवादी पार्टी, भाजपा, राष्ट्रीय लोक दल और निषाद पार्टी ने पिछले विधानसभा उपचुनावों में दस सीटों पर अपनी जीत दर्ज की थी। इन सीटों में अयोध्या का हिस्सा मिल्कीपुर विशेष रूप से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

    कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

    इस बीच कांग्रेस पार्टी ने उपचुनाव के कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने मिल्कीपुर में उपचुनाव न होने को लेकर भाजपा की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव के साथ 10 सीटों के उपचुनाव में चुनाव न कराकर भाजपा ने लोकतंत्र और संविधान की हत्या की है। अयोध्या का अपमान किया है और लोगों के वोट देने के मौलिक अधिकार को छीना है। अवस्थी ने उपचुनाव में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन का अनुमान लगाया है। जैसा कि उन्होंने अयोध्या लोकसभा क्षेत्र में किया था।

    मिल्कीपुर उपचुनाव में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद

    गोरखनाथ की याचिका वापस लेने के साथ ही मिल्कीपुर के उपचुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर भी गहरा असर डाल सकता है। चुनाव आयोग के उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल और मतदाता इस चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस सीट पर बेहद कड़ा और नजदीकी मुकाबला साबित हो सकता है।

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