कौन हैं डॉ. मेडुसा? पहलगाम हमले पर बोलने पर हुई थी देशद्रोह की FIR, अब लंबा-चौड़ा पोस्ट लिख यू-टर्न
Madri Kakoti Medusa Post: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से पूरा देश गुस्से में है। इस बीच सोशल मीडिया पर लखनऊ यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माद्री काकोटी एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने धर्म के नाम पर भेदभाव करना भी आतंकवाद बताया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद उनके ऊपर द्रेशद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ है।
देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉ. माद्री काकोटी उर्फ डॉ. मेडुसा ने एक लंब-चौड़ा पोस्ट लिखकर यू-टर्न लिया है। उन्होंने लिखा कि पहलगाम में हुए नृशंस आतंकवादी हमले पर सरकार से सवाल पूछते वीडियो और ट्वीट के संदर्भ में मैं यह स्पष्टीकरण देना चाहती हूं। चलिए जानते है कौन हैं डॉ. माद्री काकोटी उर्फ डॉ. मेडुसा?

डॉ. माद्री काकोटी कौन हैं?
डॉ. माद्री काकोटी लखनऊ यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर है। सोशल मीडिया पर वो डॉ मेडुसा के नाम से मशहूर हैं। वह अक्सर व्यंग्य के अंदाज में सरकारों की आलोचना करती हैं। वह काकोटी असम की रहने वाली हैं। पहलगाम हमले के बाद सामने आए उनके बयान से लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र नाराज हैं। उन्होंने वीसी से कार्रवाई की मांग की थी।
क्या कहा था माद्री काकोटी ने
डॉ. माद्री काकोटी ने अपने वीडियो में सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा था, 'धर्म पूछकर गोली मारना आतंकवाद है और धर्म पूछकर लिंच करना, नौकरी से निकालना, घर न देना, या घर पर बुलडोजर चलाना भी आतंकवाद है। असली आतंकी को पहचानो। प्रोफेसर का यह वीडियो पाकिस्तान में खूब देखा जा रहा है।
टीआरपी बटोरने में लगी मीडिया
वीडियो में प्रोफेसर माद्री काकोटी कहती हैं कि कश्मीर के पहलगाम में 27 लोग मारे गए। इनमें आप जैसे, मुझ जैसे दिखने वाले आम हिंदुस्तानी थे। 27 लोगों की जान चली गई और मीडिया वाले टीआरपी बटोरने में लगे रहे। जिम्मेदारों से कोई वाजिब सवाल नहीं पूछा गया। इंटरनल सिक्योरिटी में इतनी बड़ी चूक हो गई, और होम मिनिस्टर को पता तक नहीं चला।
अब लिया यू-टर्न
विवाद बढ़ने और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के बाद माद्री काकोटी ने यू-टर्न लिया है। उन्होंने लिखा, 'पहलगाम में हुए नृशंस आतंकवादी हमले पर सरकार से सवाल पूछते वीडियो और ट्वीट के संदर्भ में मैं यह स्पष्टीकरण देना चाहती हूं। मेरे द्वारा किए गए ट्वीट और बनाए गए वीडियो में आतंकवादी/आतंकी शब्द सिर्फ़ और सिर्फ़ पाकिस्तान द्वारा समर्थित और प्रायोजित आतंकवादियों के लिए है, जिन्होंने पहलगाम में धर्म पूछकर भारतीयों की निर्मम हत्या को अंजाम दिया।
इन सभी आतंकवादियों की और ऐसे पाकिस्तान समर्थित हमले की जितनी निंदा की जाए कम है। भारत की अस्मिता और अक्षुण्णता के लिए ऐसी विषम परिस्थिति में हम सभी को एकजुट रहने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। मेरा हर ट्वीट, हर वीडियो इसी बात को बार बार दोहराता है और दोहराता रहेगा। मुझे अत्यंत दुःख है कि एक शिक्षक होते हुए भी मैं यह समझा नहीं पाई कि मेरा आशय क्या था। भाषा विज्ञान की डिग्री रखते हुए भी मेरी भाषा इतनी साफ नहीं हो पाई कि मेरे देशवासियों तक मेरा संदेश सीधा पहुंचे।
देश में एकता और शांति का संदेश। मैने कभी नहीं सोचा था कि मेरे संविधान द्वारा कहे गए मेरे दायित्वों का पूर्ण श्रद्धा से निर्वहन करते हुए मुझे पाकिस्तान से जोड़ा जायेगा। इससे मेरी और मेरे विश्वविद्यालय की आत्मा पर चोट लगी है, हमारी छवि धूमिल हुई है। मेरी देशभक्ति पर सवाल खड़ा हुआ है, मुझे इस बात का खेद है कि मेरे शब्दों के अर्थ का अनर्थ हुआ है और आपको दुख पहुंचा है। मैं कल भी अपने देश और देश के लोगों के साथ खड़ी थी। आज भी हूं, और मरते दम तक रहूंगीं। जय हिंद। जय संविधान।












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