क्या 2024 से पहले Brajbhushan Sharan Singh से पीछा छुड़ाना चाहती है BJP ?

Brijbhushan Sharan Singh BJP: बीजेपी के एक नेता बताते हैं कि राम जन्मभूमि आंदोलन से उनके जुड़ाव और अयोध्या के आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रभाव के कारण था कि ब्रजभूषण सिंह शुरू में भाजपा के ध्यान में आए थे।

बृजभूषण सिंह

BJP leader Brijbhushan Sharan Singh: यूपी में कैसरगंज से सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh) अपने उपर लगे आरोपों को लेकर इस समय चर्चा में हैं। एक उम्मीदवार के तौर पर बृजभूषण शरण सिंह शायद ही कभी कोई मुकाबला हारे हों। लेकिन क्या अब उनका समय बदलेगा और महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के जो आरोप लगाए हैं वह बृजभूषण शरण सिंह पर भारी पड़ेंगे। क्या उनकी जीत का सिलसलिता अब थमेगा। हालांकि इसके लिए अभी कुछ दिनों तक और इंतजार करना होगा। दरअसल महिला पहलवान अब भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष पद से सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं।

रामजन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से राजनीति में हुई एंट्री

रामजन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से राजनीति में हुई एंट्री

बृजभूषण शहण सिंह राम जन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से राजनीति में आए थे और बाद में उनके खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस में एक मुकदमा भी दर्ज हुआ था। 66 वर्षीय सिंह ने एक "दबंग" नेता की छवि के तौर पर अपनी राजनीतिक पहचान बना रखी है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो सिंह एक ऐसी शख्सियत हैं जिनको बीजेपी की उतनी जरूरत नहीं है जितनी बीजेपी को उत्तर प्रदेश में गोंडा के आसपास के कम से कम आधा दर्जन जिलों में उनकी है।

6 बार सांसद रह चुके हैं बृजभूषण सिंह

6 बार सांसद रह चुके हैं बृजभूषण सिंह

सिंह छह बार के सांसद (एक बार सपा से) हैं और उन्होंने गोंडा, बलरामपुर का प्रतिनिधित्व किया है और अब कैसरगंज से सांसद हैं। जबकि उनके बेटे प्रतीक भूषण गोंडा सदर से विधायक के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में हैं। उनका यह दुर्जेय रिकॉर्ड यह भी बताता है कि क्यों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार और पार्टी के साथ अंदरूनी मतभेदों और खटास के बावजूद WFI अध्यक्ष और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के उपाध्यक्ष के रूप में पिछले दस सालों से बने हुए हैं।

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    गोंडा के आसपास आधा दर्जन जिलों में प्रभाव

    गोंडा के आसपास आधा दर्जन जिलों में प्रभाव

    सिंह हर साल 8 जनवरी को अपने जन्मदिन पर भव्य समारोह आयोजित करते हैं, जहां प्रतिभा खोज परीक्षा के माध्यम से चुने गए छात्रों को मोटरसाइकिल, स्कूटी और नकद के साथ पुरस्कृत किया जाता है। इस वर्ष, गोंडा और आसपास के जिलों जैसे लखनऊ, अयोध्या, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और बाराबंकी में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भाग लिया। इंजीनियरिंग, फार्मेसी, शिक्षा और कानून सहित 50 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने सक्रिय जुड़ाव के कारण बृजभूषण सिंह की इमेज सही है। उन्होंने बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या और श्रावस्ती जिलों में इसे स्थापित करने का प्रयास किया है।

    अपने दम पर चुनाव जीतते हैं बृजभूषण सिंह

    अपने दम पर चुनाव जीतते हैं बृजभूषण सिंह

    बीजेपी के ही कुछ नेता अंदरखाने ब्रजभूषण की बढ़ती शख्सियत को लेकर काफी भयभीत रहते हैं क्योंकि उन्होंने अपने रसूख से इन जिलों में अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है। गोंडा के एक भाजपा नेता कहते हैं कि,"वह उन छात्रों का शुल्क भी माफ कर देते हैं जो भुगतान करने में असमर्थ हैं। इसलिए यदि वह चुनाव जीतते हैं, तो यह उनके प्रभाव और सद्भावना दोनों के कारण हैं। बार-बार चुनाव जीतने के बावजूद पार्टी ने उन्हें संगठन और केंद्र सरकार में कोई पद नहीं देकर दूरी बना ली है। कार्यकर्ताओं की उनकी अपनी टीम उनके चुनाव प्रचार की कमान संभालती है। सिंह केवल पार्टी का सिंबल लेते हैं। वह अपने दम पर चुनाव जीतते हैं।"

    बृजभूषण ने योगी सरकार के विरोध का उठाया था जोखिम

    बृजभूषण ने योगी सरकार के विरोध का उठाया था जोखिम

    यह ब्रजभूषण सिंह के रसूख और आत्मविश्वास का ही असर है कि पिछले साल अक्टूबर में राज्य में बाढ़ के दौरान आदित्यनाथ सरकार की आलोचना तक कर डाली। उन्होंने प्रशासन पर खराब तैयारी करने, राहत के लिए पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों को "भगवान भरोसे (भगवान की दया पर)" छोड़ दिया गया है। सिंह ने यह भी कहा था कि मौजूदा सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं करती और इसे व्यक्तिगत रूप से लेती है।

    बृजभूषण के रुतबे को देखकर बीजेपी ने लिया था हाथों हाथ

    बृजभूषण के रुतबे को देखकर बीजेपी ने लिया था हाथों हाथ

    बीजेपी के नेता बताते हैं कि राम जन्मभूमि आंदोलन से उनके जुड़ाव और अयोध्या के आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रभाव के कारण था कि ब्रजभूषण सिंह शुरू में भाजपा के ध्यान में आए। पार्टी ने पहली बार उन्हें 1991 में गोंडा लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था। उन्होंने जीत हासिल की और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1996 में जब उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा तो पार्टी ने उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह को टिकट दिया और वह भी जीत गईं।

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