VIDEO: नोटबंदी के एक साल बाद उद्योगपतियों ने बताया क्या है फैसले का असर?
आईआईए के कानपुर कार्यालय में आज भी नोटबंदी की बात सुनकर छोटे और मंझले उद्योगपति सिहर उठते हैं। नोटबंदी के एक साल पूरे होने के बाद सुनिए क्या कहना है व्यापारी वर्ग का।
कानपुर। नोटबंदी के एक साल पूरे होने के बाद भी देश के छोटे और मंझले उद्योग अभी भी इस फैसले से उबर नहीं पाए हैं। इंडियन इंडस्ट्रीस एसोसिएशन का कहना है कि बीजेपी सरकार का नोटबंदी करने का फैसला एकदम सही था और नोटबंदी करना एक ऐतिहासिक साहस भरा कदम था लेकिन उद्योग इसके लिए तैयार नहीं था और ना ही सरकार ने इससे लड़ने की तैयारी कर रखी थी। इंडियन इंडस्ट्रीस एसोसिएशन के कानपुर चैप्टर ऑफिस में सभी उद्योगों के मालिकों के अंदर नोटबंदी की पीड़ा आज भी है लेकिन सरकार द्वारा उठाया गए इस कदम से लाभ दूरगामी बताए।

आईआईए के कानपुर कार्यालय में आज भी नोटबंदी की बात सुनकर छोटे और मंझले उद्योगपति सिहर उठते हैं। उनका कहना है कि बाजार से ग्राहक बिलकुल गायब हैं, जिसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ रहा है। ग्राहक के पास आज भी रुपया नहीं है जो बैंक में जमा है। ब्रेड, बिस्किट और साबुन इंडस्ट्री पर ज्यादा असर पड़ा है। इन तीनों उद्योगों पर दोहरी मार पड़ी पहले नोटबंदी की दूसरी सिक्कों की। नोटबंदी के दौरान आरबीआई ने करोड़ों के सिक्के बाजार में उतार दिए थे। ग्राहक अब रुपए ना देकर सिक्के देता है। अब तो ये हालात हैं कि व्यापारियों के पास सिक्कों के ढेर लगे हैं और बैंक सिक्के जमा नहीं कर रहा है।
आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि छोटा और मंझला उद्योग नोटबंदी के एक साल बाद भी इससे उबर नहीं पा रहा है। कानपुर चैप्टर में करीब 6500 छोटे और मंझले उद्योग हैं, जिनकी हालत नोटबंदी के बाद से खराब है। कानपुर चैप्टर का सालाना टर्नओवर 47 हजार करोड़ तक पहुंच गया था जो 10 % सालाना की वृद्धि से बढ़ रहा था तो उसके हिसाब से इस बार 54 हजार करोड़ का आंकड़ा छूना था लेकिन नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक फैसला आने के बाद 47 हजार करोड़ से घटकर टर्नओवर 38 हजार करोड़ पर आ गया। केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला ऐतिहासिक कदम है। इसके दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे लेकिन फैसला लेने के पहले जो तैयारी होती है वो पूरी तैयारी के साथ फैसला नहीं लिया गया। जिससे इंडस्ट्री को काफी नुक्सान झेलना पड़ा।












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