Deepak Gupta Murder: गौ-तस्करों ने कान और सिर की हड्डियां तोड़ी, दिल दहला देगी दीपक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
Deepak Gupta post mortem report: इंटरमीडिएट की परीक्षा में कॉलेज टॉपर और नीट (NEET) की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय दीपक गुप्ता के साथ गौ-तस्करों ने जो किया, उसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। दीपक वो ही गोरखपुर के एक छोटे से गांव का बेटा है जिसकी 15-16 सितंबर की रात गौ-तस्करों ने निर्मम हत्या कर दी थी।
पिपराइच थाना क्षेत्र के जंगल क्षत्रधारी गांव के महुआ चापी टोला के रहने वाला दीपक का कसूर बस इतना था कि गौ-तस्कर मवेशियों को चुराकर ले जा रहे तो उसने उन्हें बचाने के लिए उसने तस्करों का पीछा किया। तीन डीसीएम वाहनों में आए तस्करों ने दीपक को अगवा कर घसीटा, घंटों घुमाया, और फिर उसके मुंह में गोली मार कर हत्या कर दी। चार घंटे बाद उसका शव गांव से लगभग चार किलोमीटर दूर पाया गया है।

हत्यारों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दीपक की हत्या के बाद उसका खून से लथपथ फोटो उसी के मोबाइल से खींचकर वॉट्सऐप स्टेटस पर लगा दी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं अब दीपक की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है, उसे जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
रोंगटे खड़ी कर देगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
दीपक गुप्ता का पोस्टमार्टम दोपहर बाद दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दीपक के सिर की छह हड्डियां टूटी हुई पाई गईं। तस्करों के हमले में उसके कपाल और कान की सेंटर की हड्डियां भी टूट गई थीं।
दीपक की किस वजह से हुई मौत
रिपोर्ट में मौत का कारण अत्यधिक खून बहना बताया गया है। परिजनों ने दीपक का अंतिम संस्कार कर दिया है, लेकिन वे आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे की हत्या के बदले चार आरोपियों को भी मार देना चाहिए।
दीपक की मौत के बाद पुलिस पर लग रहे आरोप
बता दें दीपक गुप्ता की निर्मम हत्या के बाद आक्रोशित लोगों ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस पर पथराव कर पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर पुलिस ने पहले सख्ती से कार्रवाई की होती, तो आज दीपक की जान नहीं जाती। इसके बाद एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने गोरखपुर ने एसएसपी ने चौकी प्रभारी सहित सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
गांव वालों में पुलिस प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। वे कहते हैं कि पहले उन्हें केवल अपने पशुओं की सुरक्षा की चिंता थी, लेकिन अब उनके बच्चों की जान भी खतरे में है। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन पुलिस गौ-तस्करों पर लगाम लगाने में गंभीर नहीं दिख रही।












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