दादरी: पुलिस ने कहा, गो हत्या के मामले में अब तक नहीं मिले विश्वसनीय सबूत
नई दिल्ली। बीते साल सितंबर महीने के आखिरी में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) स्थित दादरी गांव में गोमांस खाने की अफवाह के चलते अखलाक की हत्या के मामले में पुलिस ने कहा है कि इस बात के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले हैं कि यह गो हत्या का मामला था।

मंगलवार (27 सितंबर) को पुलिस ने कहा है कि उसे कोई अभी तक ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है कि मोहम्मद अखलाक के परिवार ने गो हत्या की थी।
साथ ही उस दावे का खंडन भी किया जिसमें कहा जा रहा है कि पुलिस इस मामले में जल्द ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर देगी।
मेरा ट्रांसफर हो चुका है
दादरी के सर्किल अधिकारी अनुराग सिंह ने कहा कि मेरा ट्रांसफर हो चुका है और मैने आज (मंगलवार को) आगरा पदस्थ हुआ हूं। मैंने मीडिया को बताया कि अब तक हमें कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है कि अखलाक के भाई ने गो हत्या की थी इसलिए हमने उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया।
सिंह ने कहा कि 'क्लोजर रिपोर्ट के संबंध में मैने सिर्फ इतना कहा था कि यह आखिरी कदम होगा जब हमें कोई सबूत नहीं मिलेगा।'
उन्होंने कहा कि 'आखिरी समय तक जांच जारी रहेगी और जब भी हमें कोई सबूत मिलेगा, हम अभियुक्त को गिरफ्तार कर लेंगे। इस मामले में जांच अभी भी जारी है और हमने अभी क्लोजर रिपोर्ट की कोई योजना नहीं बनाई है। अब नया अधिकारी मामले को देखेगा।'
बिना कानूनी राय के नहीं दाखिल कर सकते रिपोर्ट
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी डीएसआर त्रिपाठी ने कहा कि गो हत्या के मामले में हमें अभी ऐसी कोई रिपोर्ट पुलिस से नहीं मिली है। बिना हमारी कानूनी राय के फाइनल या क्लोजर रिपोर्ट नहीं दाखिल की जा सकती। मैं नहीं सोचता कि पुलिस इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने में कोई जल्दीबाजी करेगी।'
उन्होंने कहा कि अखलाक की हत्या के मामले में 18 लोग गिरफ्ता किए गए और दो नाबालिगों को जमानत मिल चुकी है। इस मामले में कोर्ट की कार्रवाई अभी चल रही है।
त्रिपाठी ने कहा कि अखलाक और उसके परिजन कोर्ट की ओर से आदेश मिलने के बाद दर्ज किए गए मामले में आरोपी हैं लेकिन हाईकोर्ट ने अखलाक के भाई जान मोहम्मद को छोड़कर सभी की गिरफ्तारी पर स्टे दिया है।
अभियुक्त के पिता ने लगाया पुलिस पर आरोप
मामले में एक अभियुक्त के पिता और भारतीय जनता पार्टी के नेता संजय राणा ने पुलिस पर आरोप लगाया वो इस केस को बंद करने की जल्दी में है।
उन्होंने कहा कि मैं फाइनल या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए वो पुलिस या फिर उत्तर प्रदेश के किसी भी मंत्री को चुनौती देते हैं। शिकायत में पर्याप्त सबूत दिए गए हैं।
राणा ने कहा कि पुलिस इस मामले को बंद करने की जल्दी में है क्योंकि राज्य सरकार ने एक समुदाय विशेष के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपना रखी है।'












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