नोट बैन: घर में थी बेटी की शादी, ज्यादा पैसे ना निकाल पाने से चिंतित किसान ने की आत्महत्या
नोट बंदी के कारण लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
लखनऊ। 500 और 1,000 की नोट अवैध करेंसी घोषित किए जाने के बाद से देश तो लाइन में लगा ही है लेकिन जिन्हें लाइन में लगने के बाद भी कैश नहीं मिल रहा है वो बुरी तरह से परेशान हो रहे हैं।
फिलहाल में जिनके घरों में शादी है उन्हें ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कैश न मिल पाने की वजह से जहां कुछ लोग सरकार पर गुस्सा निकाल रहे हैं वहीं कुछ लोग काल के गाल में समा जा रहे हैं।
हालांकि सरकार का दावा है कि कुछ दिनों के भीतर सारी समस्याएं खत्म हो जाएगी।

बेटी के शादी के चलते थे चिंतित
ताजा मामला उत्तर प्रदेश स्थित जिला बुलंदशहर का है जहां एक किसान अपनी बेटी की शादी के बारे में चिंतित था, उसने आत्महत्या कर ली।
बताया गया कि बुलंदशहर स्थित मुरादपुर गांव के किसान देशराज सिंह ने अपने 7 बच्चों में सबसे बड़ी बेटी 19 वर्षीय किरण की शादी के लिए साहूकार के पास ढाई बीघा जमीन गिरवी रख कर 60,000 रुपए उधार लिए थे। किरण की शादी 4 दिसंबर को थी।
देशराज के परिवार के दावा है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को करेंसी के अवैध घोषित किए जाने की बात कही तो ये पैसे खाते में डाल दिए गए थे।
पेड़ से लटकता मिला शव
परिवार ने यह दावा भी किया कि देशराज का शरीर सोमवार ( 14 नवंबर ) सुबह एक पेड़ से लटकती हुई मिली। वो रविवार ( 13 नवंबर ) रात से परेशान थे और घर से कहीं चले गए थे।
देशराज के पिता यदराम सिंह ने कहा कि जब उसे यह पता चला कि एक सीमा के बाद पैसे बैंक से नहीं निकल सकते साथ ही एटीएम से भी ज्यादा पैसे नहीं निकल सकते, वो तब से परेशान था।
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार देशराज की विधवा मिथलेश ने कहा कि 'सारा पैसा बैंक में है और बैंक में लंबी लाइन है। बोल रहे हैं कि 20-25 से ज्यादा निकाल भी नहीं सकते, अब हम क्या करेंगे।'
नहीं कराया शव का पोस्टमार्टम
मुरादपुर के ग्राम प्रधान नेमपाल ने कहा कि देशराज के परिवार ने पुलिस से यह अनुरोध किया कि उनके शव का परीक्षण न किया जाए और सोमवार को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि किसान देशराज, आसपास में सिर्फ 1 बैंक और कोई एटीएम ना होने से चिंतित था।
जिलाधिकारी आंजनेय कुमार ने कहा कि किसान के खुदकुशी करने की वजह की जांच की जाएगी। किसान ने किसी प्रशासनिक अधिकारी से इस मामले में कोई बात नहीं की।












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