• search
उत्तर प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

चुनाव से पहले भावनात्मक मुद्दों को ही टारगेट करेगी कांग्रेस, संघर्ष से पैदा सहानुभूति को भुनाने की कोशिश

|
Google Oneindia News

लखनऊ, 07 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी यूपी में पूरी ताकत झोंक रही हैं। खासतौर पर वह भावनात्मक मुद्दों पर ही फोकस कर रही हैं। पिछले कुछ महीनों से प्रियंका एक के बाद एक मामलों में योगी सरकार से दो दो हाथ करती नजर आ रही हैं। दरअसल प्रियंका गांधी ने पार्टी की रणानीति के तहत ही भावनात्मक मुद्दों को उठाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने की कोशिश क रही हैं। दरअसल कांग्रेस के सूत्रों की माने तो उन्हें उन्हीं मुद्दों पर संघर्ष करने को कहा गया है जो भावनात्मक हों या कानून व्यवस्था से जुड़े हुए हों।

प्रियंका गांधी

पार्टी के रणनीतिकारों की माने तो महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दे पर संघर्ष जरूरी है लेकिन इस पर पूरी तरह से फोकस करने से यूपी में जनाधार बढ़ाना मुश्किल है। वहीं दूसरी ओर सोनभद्र का उम्भा कांड, हाथरस कांड या उन्नाव रेप केस हो इससे लोगों से भावनात्मक तरीके से जुड़ने का मौका मिलता है। इन मुद्दों के जरिए जहां पार्टी का जुड़ाव सकारात्मक दृष्टिकोण और जुझारू छवि विकसित करता है वहीं मतदाताओं को भी करीब लाने में मदद करता है। प्रियंका का लखीमपुर खीरी कांड का विरोध पार्टी की उसी रणनीति का हिस्सा है माना जा रहा है।

संघर्ष से मिल रही सहानुभूति को भुनाने की कोशिश
पार्टी के एक प्रदेश पदाधकारी ने बताया कि प्रियंका गांधी के संघर्ष की वजह से आम लोगों को कांग्रेस को लेकर जो सहानुभूति पैदा हो रही है उसे चुनाव तक बरकरार रखने की जिम्मेदारी पार्टी और कार्यकर्ताओं की। नेताओं और कार्यकर्ताओं को सीधे तौर पर कहा गया है कि प्रियंका के संघर्ष के बाद पार्टी को हर गांव और हर मुहल्ले तक पहुंचाने का अभियान चलाया जाएगा। एक आंदोलन से दूसरे आंदोलन के बीच मिलने वाले ब्रेक में घर में बैठने की बजाए फील्ड में काम करना और टीम को सक्रिय करना है।

प्रियंका

2019 लोकसभा के दौरान प्रियंका को मिली थी कमान
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश का संयुक्त प्रभार दिया गया था। उनके भाई राहुल गांधी तब कांग्रेस अध्यक्ष थे। कांग्रेस ने एक फॉर्म में 80 सीटें जीती थीं। 2014 में कांग्रेस ने दो में जीत हासिल की थी। यह 2017 के विधानसभा चुनावों में एक निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे आया था जिसमें कांग्रेस ने सिर्फ सात सीटें जीती थीं। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक रग पर व्यावहारिक रूप से पस्त होने के बाद, प्रियंका गांधी के पास 2022 के विधानसभा चुनावों में एक कठिन कार्य है।

इसे एक चुनौती मानते हुए प्रियंका गांधी ने हाल ही में कहा था कि,

''हमारी कांग्रेस पार्टी 1989 से यानी राज्य में पिछले 32 सालों से सत्ता से बाहर है। 2017 में, हमने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन यह हमारे पक्ष में नहीं रहा। लेकिन हमें 2022 के चुनाव को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना है और उसपर काम करना है। जनता के बीच जाने से ही लोगों का जुड़ाव होगा और आने वाले समय में वही जुड़ाव हमारे लिए उपयोगी साबित होगा।''

प्रियंका
    Navratri 2021: नवरात्रि के पहले दिन मां के दर्शन करने मंदिर पहुंचीं Priyanka Gandhi | वनइंडिया हिंदी

    यूपी विधानसभा चुनाव 2022 पर पूरी नजर
    प्रियंका गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नए जमाने के राजनीतिक अभियानों के लिए प्रशिक्षित करने पर जोर दिया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना शुरू कर दिया है, जो श्रमिकों से कैडर में परिवर्तन करने का प्रयास है। भाजपा लंबे समय से इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के लिए जानी जाती है। "उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रशिक्षण अभियान" कहा जाता है, पार्टी का लक्ष्य अगले 100 दिनों में लगभग 700 ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना है।

    यह भी पढ़ें-'अंत तक, अंजाम तक', न्याय के लिए लड़ूंगी, लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद बोलीं प्रियंकायह भी पढ़ें-'अंत तक, अंजाम तक', न्याय के लिए लड़ूंगी, लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद बोलीं प्रियंका

    English summary
    Congress will target only emotional issues before the elections in UP, trying to capitalize on the sympathy generated by the struggle,
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X