यूपी में सपा-कांग्रेस की नज़र 35-37 फीसदी वोट पर

यूपी की राजनीति में सपा और कांग्रेस 35 फीसदी से अधिक वोटो पर रख रही हैं नजर, अन्य दलों के लिए यह गठबंधन खड़ी कर सकता है मुसीबत

लखनऊ। यूपी में काफी लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के भीतर विवाद चलता रहा जिसके चलते तमाम राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में दिक्कत महसूस कर रहे थे, लेकिन अखिलेश यादव को सपा का स्वामित्व मिलने के बाद कांग्रेस सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। सपा-कांग्रेस मिलकर प्रदेश में 35 से 37 फीसदी वोटों का साधने की कोशिश कर रही हैं। जिसमें मुख्य रूप से 25 फीसदी वोट गैर मुस्लिम जबकि बाकी का मुस्लिम वोट इस गठबंधन के लिए अहम है। प्रदेश में मुस्लिम आबादी कुल 18 फीसदी है जोकि इस गठबंधन के लिए काफी अहम है।

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सपा-कांग्रेस के बीच औपचारिक ऐलान होना अभी बाकी है और माना जा रहा है कि यह ऐलान जल्द हो सकता है। दोनों दल मिलकर यूपी की सियासी दंगल को जीतने की कोशिश करेंगे और इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा और बसपा हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय पार्टी से गठबंधन काफी अहम है, कांग्रेस जातिगत राजनीति के लिए नहीं जानी जाती है ऐसे में सवर्ण वोट इस गठबंधन की ओर अपना रुख कर सकता है।

अहम हैं वोटों का विभाजन
इस गठबंधन के जरिए देश में एक बड़ा सेक्युलर गुट तैयार करने की भी कोशिश की जा रही है और मुस्लिम वोट को कांग्रेस अपनी ओर करने की पूरी कोशिश करेगी। हाल ही में सपा के भीतर मचे घमासान के बीच मायावती ने मुस्लिम वोटों को साधने की पुरजोर कोशिश की थी, लिहाजा यह गठबंधन प्रदेश में काफी अहम साबित होने वाला है। दोनों ही दल मिलकर ना सिर्फ मुसलमानों को एक विकल्प देने की तैयारी कर रहे हैं बल्कि भाजपा को सांप्रदायिक ताकत के रुप में लोगों के बीच प्रोजेक्ट भी कर रही है। यूपी में सवर्ण वोट 25 फीसदी हैं, जबकि 10 फीसदी यादव और 26 फीसदी गैर यादव ओबीसी, 18 फीसदी मुसलमान व 21 फीसदी दलित हैं।

अखिलेश को मिलेगा छवि का लाभ
ऐसे माहौल में समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे सवर्ण जाति, ओबीसी को भाजपा से दूर रखते हुए अपनी ओर खींच सके। जब अखिलेश यादव ने अमर सिंह पर निशाना साधना शुरु किया था तो उन्होंने इस तरह की छवि बनाने मे सफलता हासिल की थी कि वह नकारात्म चीजों को पार्टी से दूर रखना चाहते हैं और वह अब खुद पार्टी के भीतर मुलायम सिंह के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश सपा के नए नेता के रूप में सामने आए हैं और इसका लोगों के बीच एक बेहतर संकेत गया है जो उनके लिए अहम साबित हो सकता है।

बसपा तय करेगी रुख
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जिस तरह से बसपा ने 100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है वह काफी अहम साबित होने वाला है। इन उम्मीदवारों के चलते ये उम्मीदवार मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करेंगे। यूपी में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को कुल 43 फीसदी वोट मिले थे जिसमें सभी हिंदू वोट शामिल थे। ऐसे में सपा-कांग्रेस की रणनीति बसपा के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। अगर दलितों के साथ मुस्लिम वोट बसपा के साथ आया तो यह चुनाव बसपा के साथ होगा, लेकिन अगर मुसलमान बसपा से दूर हुए और दलितों ने अपना वोट बसपा को दिया तो यूपी चुनाव त्रिशंकु हो सकते हैं।

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