इलाहाबाद की चुनावी होली में खिलेगा कौन रंग, कौन पड़ेगा फीका
यूपी चुनाव के नतीजे आने के बाद इलाहाबाद की 12 सीटों पर किस पार्टी का रंग चढ़ेगा और किसका उतरेगा? पढ़िए, होली पर चुनावी नतीजों का एक आंंकलन।
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार की होली सामान्य नहीं है। होली से 2 दिन पूर्व उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। जनता की कसौटी पर खरे उतरने वाले प्रत्याशियों की तुलना निश्चित तौर पर भक्त प्रह्लाद से होगी क्योंकि वह सूबे की इस राजनैतिक आग में कोयला से कुंदन बन बाहर निकलेंगे। वहीं हारे हुए प्रत्याशियों की तुलना बुराई से होगी और वह होलिका में दहन हो जायेगी।

किसका रंग चढ़ेगा, किसका उतरेगा?
वैसे तो होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार है पर इस बार सूबे के लिए यह त्यौहार काफी रंग - बिरंगा और बेहद खास होने वाला है। वजह भी साफ है कि उत्तर प्रदेश को अगले 5 साल के लिए मुख्यमंत्री मिलने वाला है। अगले 5 साल के लिये सरकार मिलने वाली है। फिलहाल यह तो भविष्य बतायेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनता है और प्रदेश के लिए आने वाले पाँच सालों के लिए क्या काम करता है? लेकिन यह सबसे दिलचस्प होगा कि उन पार्टियों का क्या रंग होगा, जिन पर इस बार सूबे की राजनीति का दारोमदार है? हर पार्टी का अपना खास रंग है। किसका रंग चढ़ता है, किसका उतरता है। सबकुछ होली पर साफ दिखेगा।

इलाहाबाद में 12 विधानसभा सीटों पर क्या होगा रंगो का मिजाज
इलाहाबाद की 12 विधानसभा सीट पर जीत के लिये किसी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। बसपा, सपा व भाजपा का हर बड़ा चेहरा यहां आकर अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है । अब भाजपा का भगवा का कलर सबसे चटक होगा या पिछले विधानसभा की तरह सपा हरा रंग रंगने में कामयाब होगी। फिलहाल बसपा का नीला रंग भी अपनी प्रचंड रूप में है। रंगों का असल राज तो वोटों की गिनती के साथ खुलेगा जो होली के बाद भी छाया रहेगा। हर किसी के गढ़ में सेंध लगी है और मोदी फैक्टर फिर से काम कर रहा है। ऐसे में भाजपा का इस बार खाता खोलना तो तय है। लेकिन सभी 12 विधान सभासीटों पर खुद को विजेता घोषित कर चुके भाजपा प्रत्याशी अति-आत्मविश्वास के भी शिकार नजर आ रहे हैं।

साइलेंट कलर होगी बसपा
बसपा को इस बार उतनी चर्चा नहीं मिल पाई जितनी कि भाजपा व सपा-कांग्रेस गठबंधन ने हासिल की। इसकी एक वजह यह भी थी कि बसपा की ताकत में रंग भरने वाले कई बड़े नेता एक-एक कर साथ छोड़ते गये और एक-एक कर दूसरे दलों का रंग चटक करते रहे । लेकिन बसपा के पास एक बड़ा वोट बैंक है, जो फिक्स माना जा रहा है। ऐसे में नीला हाथी साफ तौर पर साइलेंट कलर बनकर छा सकता है।
उड़ेगा रंग चेहरे का भी
विधानसभा चुनाव का रिजल्ट जैसे ही घोषित होने लगेगा प्रत्याशी के रंगों के चेहरे खिलेंगे भी और उड़ेंगे भी। इलाहाबाद की बात करें तो यहां महिला प्रत्याशियों की होली पुरुषों से तगड़ी होगी। इलाहाबाद छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, यूनिवर्सिटी छात्र नेत्री निधि यादव, विधायक विजमा यादव पर सपा के रंग को गाढा करने की जिम्मेदारी है तो वहीं विधायक पूजा पाल व गीता देवी आसमान तक नीला रंग उड़ा सकती हैं । हलांकि इन सबके बीच नीलम करवरिया व प्रमिला त्रिपाठी का भगवा कलर चढ़ना तय माना जा रहा है ।

रंग बिरंगे हैं आंकड़े
इलाहाबाद के फूलपुर में प्रवीण ने भगवा रंग तेज कर दिया है तो वहीं हण्डिया में प्रमिला त्रिपाठी कप प्लेट का गेरुआ रंग हवा में उड़ाया है। शहर पश्चिमी में विधायक पूजा पाल नीला रंग बिखेर रही हैं। पर टक्कर में सिद्धार्थ भी भगवा लेकर दौड़ रहे हैं। बारा में तीनों रंग बराबर हैं तो मेजा में नीलम का भगवा रंग सबसे ज्यादा दिखा है। करछना में हरा रंग उज्जवल हो रहा है। लेकिन नीले रंग का दीपक भी प्रचंड है।
प्रतापपुर में विधायक विजमा यादव हरे रंग के साथ आगे हैं लेकिन मुज्तबा का नीला रंग भी नजर आ रहा है। सोरांव सुरक्षित सीट पर मौजूदा सपा के विधायक सत्यवीर मुन्ना, अपना दल के जमुना व बसपा की गीता के बीच रंगबिरंगी लड़ाई है। जबकि फाफामऊ विधानसभा सीट सपा विधायक अंसार अहमद, बसपा के मनोज पाण्डेय व भाजपा से पूर्व मंत्री विक्रमाजीत मौर्या भी तिरंगे की लड़ाई लड़ रहे हैं। कोरांव में राजमणि, रामकृपाल, राजबली में त्रिकोणीय रंगों का मुकाबला है। इलाहाबाद शहर उत्तरी पर आंकड़े में अनुग्रह का हाथ का पंजा हरे रंग में रंगता दिख रहा है। लेकिन हर्ष का भगवा रंग भी अभी फीका नहीं हुआ है। शहर दक्षिणी में भी नंदी का भगवा छाया है लेकिन सपा विधायक परवेज दो रंगों के मिलन से खुद को रंग सकते हैं।












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