CM Yogi Singapore Visit: सिंगापुर मॉडल से चमकेगी यूपी की शिक्षा व्यवस्था, यूपी सरकार-ITEES के बीच महा-समझौता
CM Yogi Singapore Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा राज्य के शैक्षिक परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई है। इस यात्रा का मुख्य केंद्र ITE कॉलेज सेंट्रल रहा, जहां यूपी सरकार और ITE एजुकेशन सर्विसेज (ITEES) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस सहयोग का प्राथमिक उद्देश्य उत्तर प्रदेश के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा (TVET) ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के सफल 'वर्क-स्टडी' मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया, जिसे अब यूपी के आईटीआई (ITI) और पॉलिटेक्निक संस्थानों में लागू किया जाएगा।

सिंगापुर का 'वर्क-स्टडी' मॉडल और यूपी का कायाकल्प
सिंगापुर का शिक्षा मॉडल दुनिया भर में अपनी व्यावहारिक ट्रेनिंग के लिए जाना जाता है। इस समझौते के तहत, उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों में अब केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि 'काम करते हुए सीखना' (Work-Study) पद्धति अपनाई जाएगी। इसका मतलब है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में वास्तविक काम का अनुभव मिलेगा। इससे राज्य के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का बुनियादी ढांचा आधुनिक बनेगा और वहां के लैब और वर्कशॉप को सिंगापुर की तर्ज पर अपग्रेड किया जाएगा।
युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्किल ट्रेनिंग
इस साझेदारी का सबसे बड़ा लाभ यूपी के युवाओं को मिलेगा। अब उन्हें विश्व स्तरीय कौशल प्रशिक्षण (Global Skill Training) के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। ITEES के विशेषज्ञ यूपी के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जो आगे चलकर छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करेंगे। इससे न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उन्हें उन्नत तकनीकों, जैसे रोबोटिक्स और ऑटोमेशन में महारत हासिल होगी, जो आज के वैश्विक बाजार की सबसे बड़ी मांग है।
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रोजगार के नए अवसर और 'ग्लोबल स्किल हब' का सपना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन उत्तर प्रदेश को एक 'ग्लोबल स्किल हब' बनाना है। इस MoU के जरिए तैयार होने वाली कुशल जनशक्ति को न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आसानी से नौकरियां मिल सकेंगी। जब यूपी के युवाओं के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का सर्टिफिकेट और हुनर होगा, तो बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां राज्य की ओर आकर्षित होंगी। यह कदम राज्य में निवेश बढ़ाने और बेरोजगारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।












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