7 घंटे तक रखा रहा मां का शव... 4 बीघा जमीन के लिए तीन बेटियों में लड़ाई, नहीं होने दिया अंतिम संस्कार
Mathura News: आज के दौर में लोग रिश्तों और मर्यादा को भूलकर बस पैसा और संपत्ति को तवज्जों देने में लगे हैं। किसी ने कही कहा है कि 'बाप-बड़ा ना भैय्या, सबसे बड़ा रुपैया'। संतान पैसों के लिए अपने माता-पिता से भी अंतिम वक्त में मुंह मोड़ लेती है। अब ऐसा ही कुछ यूपी के मथुरा से सामने आया है, जहां मां की 4 बीघा जमीन के लिए तीन बहनें आपस में भीड़ गईं।
मथुरा में मां के अंतिम संस्कार से पहले जमीन के लिए तीन बेटियां में आपस टकवार हो गया, जिसके चलते श्मशान में ही 7 घंटे तक मां का शव रखा रहा। बेटियों में जब तक जमीन के बंटवारे का फैसला नहीं हुआ, तब चिता पर अंतिम संस्कार नहीं करने दिया।

शर्मसार कर देने वाली घटना मथुरा के गोविंद नगर इलाके के बिरला मंदिर के पास श्मशान घाट की है। जानकारी के मुताबिक रविवार (14 जनवरी) दोपहर 98 साल की पुष्पा देवी का शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया था।
श्मशान घाट पर ही स्टांप पेपर मंगाया
पुष्पा देवी के कोई बेटा नहीं था और तीन बेटियां थी। जिसके बाद श्मशान में ही अंतिम संस्कार से पहले तीन बेटियों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया। मां की चार बीघा जमीन के लिए बहनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि श्मशान घाट पर ही स्टांप पेपर मंगाया गया।
पुलिस ने कराई लिखा-पढ़ी
स्थानीय लोगों के अनुसार 7 से आठ घंटे तक तीनों बहनें संपत्ति को लेकर आपस में झगड़ती रहीं और उनकी मां का शव श्मशान में चिता पर ही रखा रहा। इस विवाद की खबर जैसे ही पुलिस तक पहुंची तो एक टीम श्मशान घाट पहुंची और घंटों की समझाइश के बाद स्टाम्प पेपर पर तीनों में लिखित समझौता कराया। इसके बाद तीनों बेटियों के बेटों ने संयुक्त रूप से वृद्धा का अंतिम संस्कार किया गया।
बारी-बारी से बेटियों के साथ रहती थी पुष्पा देवी
बता दें कि पुष्पा देवी के पति गिर्राज प्रसाद का निधन पहले ही हो चुका था। कोई बेटा ना होने के कारण वृद्धा बारी-बारी से अपनी तीनों बेटियों के पास ही रहती थीं। जिस वक्त निधन हुआ, उस दौरान वह मथुरा के आनंदपुरी में बेटी मिथिलेश के यहां पर थीं।












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