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भारत के चीफ जस्टिस गवई भी हुए सीएम योगी के मुरीद, बोले- "सीएम योगी तो पॉवरफुल हैं", देखें VIDEO

CJI praised the CM Yogi: उत्‍तर प्रदेश के तेज-तर्रार मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के मुरीद देश के मुख्‍य न्‍यायाधीश बीआर गवई भी हैं। इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में सीजेआई बीआर गवई ने सीएम योगी आदित्‍यनाथ की जमकर तारीफ की और उनको लेकर बड़ा बयान दिया है। CJI ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ सबसे मेहनती और देश के पावरफुल सीएम बताया। खास बात ये है कि इस कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्‍यनाथ भी मौजूद थे।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा, "कानून और न्‍याय मंत्री मेघवाल जी ने कहा कि (सीएम) योगी जी इस देश के सबसे शक्तिशाली और मेहनती सीएम हैं। मैं कहना चाहूंगा कि इलाहाबाद पॉवरफुल लोगों धरती है और सीएम योगी पॉवरफुल हैं ही।"

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चीफ जस्टिस गवई ने सीएम योगी की तारीफ ऐसे कार्यक्रम में की जहां पर पर वो भारत के संविधान पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान देश के लिए ताकत का स्तंभ रहा है, जिसने विभिन्न संकटों के दौरान एकता और ताकत सुनिश्चित की है। मुख्य न्यायाधीश ने पड़ोसी देशों द्वारा सामना की गई चुनौतियों के बावजूद, स्वतंत्रता के बाद भारत की प्रगति में संविधान ने अहम भूमिका निभाई है।

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'जब देश संकट का सामना करता है, तो संविधान हमें एकजुट रखता है'

भारत की प्रगति में संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात करते हुए न्यायाधीश ने कहा, "आज हम देखते हैं कि हमारे पड़ोसी देशों की क्या स्थिति है। और भारत स्वतंत्रता के बाद विकास की ओर बढ़ रहा है। जब भी देश में कोई संकट आया है, तो हमारा देश एकजुट और मजबूत रहा है। इसका श्रेय संविधान को दिया जाना चाहिए।"

बाबासाहेब ने हमें ऐसा संविधाान दिया जो...

आलोचनाओं पर डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए सीजेआई ने कहा, "बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने जवाब दिया था कि संविधान न तो पूरी तरह से संघीय है और न ही पूरी तरह से एकात्मक। लेकिन एक बात मैं आपको बता सकता हूं कि हमने एक ऐसा संविधान दिया है जो शांति और युद्ध दोनों समय में भारत को एकजुट और मजबूत बनाए रखेगा।"

सीजेआई गवई ने देश के हर नागरिक की सेवा करने के लिए न्यायपालिका के मौलिक कर्तव्य पर भी जोर दिया। उन्‍होंने ने कहा "इस देश के अंतिम नागरिक तक पहुंचना हमारा मौलिक कर्तव्य है, जिसे न्याय की आवश्यकता है। चाहे वह विधायिका हो, कार्यपालिका हो या न्यायपालिका हो, सभी को उस नागरिक तक पहुंचना होगा।"

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