Caste Census: 'कांग्रेस अपना काला इतिहास भूल गई', आखिर कांग्रेस पर क्यों भड़कीं मायावती?
Caste Census: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर से कांग्रेस पर निशाना साधा है, जाति मतगणना का क्रेडिट लेने में जुटी कांग्रेस को मायावती ने मौकापरस्त होने का आरोप लगाया है और पूछा है कि वो अपना काला इतिहास भूल गई है क्या?
यूपी की सियासत में बहनजी के नाम से लोकप्रिय मायावती ने एक्स पर एक नहीं चार ट्वीट किए है, जो कि निम्नलिखित हैं, जिसमें उन्होंने लोगों से सलाह दी है कि वो बीजेपी और कांग्रेस दोनों से सावधान रहें।

पहला Tweet (Caste Census)
सन् 1931 व आज़ादी के बाद पहली बार देश में जातीय जनगणना कराने के केन्द्र के निर्णय का श्रेय लेने में कांग्रेस यह भूल गयी कि दलित व ओबीसी समाज के करोड़ों लोगों को आरक्षण सहित उनके संवैधानिक हक़ से वंचित रखने में उसका इतिहास काला अध्याय है व इस कारण उसे सत्ता भी गंवानी पड़ी है।
दूसरा Tweet
किन्तु सत्ता विहीन होने के बाद कांग्रेस नेतृत्व का खासकर दलित व ओबीसी समाज के प्रति नया उभरा प्रेम विश्वास से परे इन वर्गों के वोट के स्वार्थ की खातिर छलावा की अवसरवादी राजनीति। वैसे भी आरक्षण को निष्क्रिय बनाकर अन्ततः इसको खत्म करने की इनकी नापाक मंशा को कौन भूला सकता है?
तीसरा Tweet
वैसे आरक्षण व संविधान के जनकल्याणकारी उद्देश्यों को फेल करने में भाजपा भी कांग्रेस से कम नहीं, बल्कि दोनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। किन्तु अब वोटों के स्वार्थ व सत्ता के मोह के कारण भाजपा को भी जातीय जनगणना की जन अकांक्षा के आगे झुकना पड़ा है, जिसका स्वागत।
चौथा Tweet
साथ ही, संविधान निर्माता बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न से सम्मानित करने से लेकर धारा 340 के तहत ओबीसी को आरक्षण देने जैसे अनेकों मामलों में कांग्रेस व भाजपा का रवैया जातिवादी व द्वेषपूर्ण रहा है, किन्तु इनके वोट की राजनीति के खेल निराले हैं। लोग सावधान रहें।
केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी (Caste Census)
आपको बता दें कि हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी है जिसके बाद से राजनीतिक पार्टियों में इसका क्रेडिट लेने की होड़ मच गई है। हर दल अपना राग अलाप रहा है और हर किसी के अलग-अलग तर्क भी हैं। राजनेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आइए जानते हैं कि आखिर जाति जनगणना है क्या?
जाति जनगणना क्या है?
जाति जनगणना का तात्पर्य जनसंख्या गणना के दौरान लोगों की जातिगत पहचान दर्ज करने से है। इसका उद्देश्य समाज में विभिन्न जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को जानना होता है, जिससे सरकार को लोगों के लिए नीतियां बनाना आसान हो जाए।
जाति जनगणना का इतिहास
- भारत में पहली बार जाति आधारित आंकड़े 1871 में ब्रिटिश सरकार ने दर्ज किए थे।
- इसके बाद यह प्रक्रिया 1931 तक जारी रही।
- 1931 की जनगणना आखिरी बार थी जिसमें सभी जातियों के आंकड़े दर्ज किए गए थे।
- स्वतंत्र भारत में केवल अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की गिनती हुई।
- 2023 में बिहार सरकार ने अपनी जाति आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की, जिसमें OBC और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) की बड़ी संख्या सामने आई थी।












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