आजम खां के विवादित बयान पर अब SC की संवैधानिक पीठ करेगी फैसला

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    नई दिल्‍ली। राइट टू स्‍पीच के नाम पर क्‍या सरकार के मंत्री या जनप्रतिनिधि पॉलिसी और विधान के विपरीत बयान दे सकते हैं? अब इस बात का फैसला सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ लेगी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्‍यीय बेंच ने मामले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेज दिया है। दरअसल बुलंदशहर गैंगरेप मामले में आजम खान के विवादित बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था। इससे पहले कोर्ट से आजम खान ने बिना शर्त माफी मांग ली थी और कोर्ट ने उस माफीनामे को स्‍वीकार भी कर लिया था।

    मंत्री-जनप्रतिनिधि विधान के विपरीत बयान दे सकते हैं? अब SC की संवैधानिक पीठ करेगी फैसला

    तब कोर्ट ने कहा भी था कि राइट टू स्पीच के नाम पर क्या आपराधिक मामलों में सरकार के मंत्री या जनप्रतिनिधि पॉलिसी और विधान के विपरीत बयान देना उचित है क्या? सुनवाई के दौरान न्याय मित्र यानी एमाइकस क्यूरे हरीश साल्वे ने कहा कि मिनिस्टर संविधान के प्रति जिम्मेदार है और वह सरकार की पॉलिसी और विधान के खिलाफ बयान नहीं दे सकता।

    क्‍या कहा था आजम खान ने

    बुलंदशहर गैंगरेप को आजम खान ने राजनीतिक साजिश कहा था। आजम खां ने कहा था कि यूपी में हो रही वारदातों के पीछे राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश भी हो सकती है। इस बयान पर पीड़ित के परिवार वालों ने भी अफसोस जताया था। उल्‍लेखनीय है कि बुलंदशहर गैंगरेप इस साल जुलाई के आखिरी में हुआ था। जब एक परिवार रात को गाड़ी से नोएडा से उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जा रहा था।

    बुलंदशहर में घुसते ही, उनकी कार एक छोटे एक्सीडेंट का शिकार हो गई, जैसे ही कार रुकी पांच आदमियों के झुंड ने परिवार को पास के खेत में घसीटकर उनके साथ लूटपाट और बलात्कार किया। आरोपियों ने परिवार के पुरुषों को रस्सी से बांध दिया गया और महिला और उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया था।

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    English summary
    The Supreme Court on Thursday referred to a five-judge constitution bench questions like whether a public functionary or a minister can claim freedom of speech while airing views in a sensitive matter which is under investigation.

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