पाकिस्तान में ही नहीं, यूपी में भी है एक 'बलूचिस्तान' जहां बस सकते हैं बुग्ती!
बागपत। अगर बलूचिस्तान के निर्वासित नेता ब्रह्मदाग बुग्ती को भारत में राजनीतिक शरण दी जाती है तो उत्तर प्रदेश में एक जगह वह बसने की सोच सकते हैं जहां काफी संख्या में उनको बलोची भाई बंधु मिल जाएंगे।
पाकिस्तान में ही नहीं, वहां से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में भी एक बलूचिस्तान है जहां काफी बलूची लोग रहते हैं और वहां की संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में बलूचियों के इस गांव का नाम बिलोचपुरा है।

बिलोचपुरा में जिंदा है बलूची संस्कृति
बागपत के बिलोचपुरा और आसपास के दर्जनभर गांवों में बलूचिस्तान के निवासियों के हजारों वंशज बसे हैं और बलूची संस्कृति यहां अभी भी देखने को मिलती है।
धीरे-धीरे देश में अब इन बलूचियों को पहचान मिलने लगी हैं। यूपी के बलूचियों के नेता के रूप में हाल में इरफान उभर कर सामने आए हैं।
बलूचिस्तान आंदोलन को यूपी के बलूचियों का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण के बाद बलूचिस्तान सुर्खियों में छाया। वहां चल रहे पाकिस्तान से आजादी के आंदोलन का असर बिलोचपुर में भी है। यहां के लोग बलूचिस्तान में अपने लोगों पर हो रहे अत्याचार की खिलाफत करते हैं और अपने भाइयों की मदद करना चाहते हैं।
बलूचिस्तान से इमोशनली जुड़े हैं बिलोचपुरा के लोग
बिलोचपुरा के हाजी अख्तर बताते हैं कि हमारे पूर्वज बलूचिस्तान से थे, यह हम कभी नहीं भूल सकते। बलूचियों से हम भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं और वे हमेशा हमारे दिल से जुड़े रहेंगे।

यूपी में बलूचियों के नेता इरफान पठान
बिलोचपुरा इलाके में इरफान पठान की पहचान एक मुस्लिम नेता के रूप में थी लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उनकी पहचान बलूची नेता के रूप में होने लगी है।
देश में इरफान बलूचियों का एक नेटवर्क बना रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए वे उनको एकजुट कर रहे हैं।
सितंबर में बलूचिस्तानी नेता दिलशाद मजदक आए बिलोचपुरा
बलूचिस्तान की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नेता दिलशाद मजदक इसी महीने बिलोचपुरा आए और लोगों से समर्थन मांगा।
बिलोचपुरा और आसपास के गांवों में रहने वाले बलूची मूल के भारतीय, बलूचिस्तान की आजादी के आंदोलन में कूद पड़े हैं।
मराठा काल में आए थे बलूची
इतिहासकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बलूची मराठा काल में आए थे। वे तोप चलाने और युद्ध कला में माहिर लोग थे।
बाबर ने 1526 में जब भारत पर आक्रमण किया तो वे उनके साथ आए और यहीं के होकर रह गए। दिल्ली और पश्चिमी यूपी के इलाकों के कई गांवों में बलूची बस गए।
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