Israel Hamas war: मायावती का बयान दोनों हाथ में लड्डू वाला, Modi और विपक्ष पर पेंडुलम राजनीति जारी
Israel-Hamas युद्ध का भारत की इंटरनल राजीनीति में छौंका लग चुका है। प्रमुख राजनीतिक दल इस पर अपने कोर वोट बैंक के हिसाब से बयानबाजी करने में जुट गए हैं। ऐसे में बसपा सुप्रीमों ने भी आज अपना मुंह खोला है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मायावती की राजनितिक दिशा को न तो एनडीए, न इंडिया गठबंधन के दल और न ही बसपा के कोर वोटर समझ पा रहे हैं। इस खबर में आपको मायावती के Israel-Hamas युद्ध पर बयान से रूबरू कराते है, समझिये आखिर उनका क्या सियासी मतलब है।
दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर गाजा युद्ध को लेकर कहा, "भारत अपनी आज़ादी के बाद से ही विश्व में शान्ति, सौहार्द, स्वतंत्रता के लिए तथा नस्लभेद आदि के विरुद्ध अति गंभीर व सक्रिय रहा है, जिसकी प्रेरणा और शक्ति उसे उसके समतामूलक एवं मानवतावादी संविधान से मिली है। दुनिया में भारत की यह पहचान बनी रहनी चाहिए।"

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए यह भी कहा कि "युद्ध दुनिया में कहीं भी हो आजके ग्लोबल वर्ल्ड में अधिकतर देशों की अर्थव्यवस्था एक-दूसरे पर काफी हद तक जुड़ी/निर्भर है। यूक्रेन युद्ध लगातार जारी है व दुनिया इससे प्रभावित है। इसीलिए विश्व में कहीं भी नया युद्ध मानवता के लिए कितना विनाशकारी होगा इसका अन्दाजा लगाना मुश्किल नहीं।"
मायावती ने पूर्व में प्रधानमंत्री मोदी के दिए गए बयान को कोट करते हुए यह भी बोला कि "यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम श्री नरेन्द्र मोदी ने जब यह कहा कि 'This is not an era of war' अर्थात् आज का युग युद्ध का नहीं है, तो इसकी प्रशंसा पश्चिमी नेताओं ने खूब की और अब गाज़ा युद्ध को लेकर भी भारत को अपने इस स्टैण्ड पर ऐसी मजबूती से खड़े रहने की जरूरत है जो सबको अनुभव हो।"
अब यह समझना भी जरूरी है कि आखिर इसके राजनैतिक मायने क्या हो सकते हैं? वैसे देखा जाए तो मायावती का बयान बेहद कूटनीतिक यानि इतना सधा सधा हुआ है कि इसे दोनों में से किसी भी पक्ष में ढाला जा सकता है। लेकिन मायावती चाहें तो समझने और व्याख्या करने वाले पर जब चाहें सवाल कर गलत मतलब निकालने का आरोप लगा सकती हैं। कुल मिलाकर मायावती का यह बयान भी उनकी हालिया राजनीति जैसा पेंडुलम की तरह कभी इधर तो कभी उधर डोलता नजर आ रहा है।












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