यूपी में कांग्रेस को बड़ा झटका, जितिन प्रसाद के भैया-भाभी BJP में हुए शामिल
शाहजहांपुर। प्रदेश में निकाय चुनाव आते ही नेताओं का दल बदलना भी शुरू हो गया है। यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के चचेरे भाई कुंवर जयेश प्रसाद ने अपनी पत्नी के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया है। इस दौरान उनके साथ 50 प्रधान, 8 ब्लॉक प्रमुख, 20 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 200 कार्यकर्ता भी शामिल हुए। खास बात ये है कि बीजेपी ने शहर की नगरपालिका सीट पर कांग्रेसी नेता के चचेरे भाई की पत्नी पर भरोसा जताते हुए टिकट दे दिया। बीते दो बार से यहां नगरपालिका चैयरमैन सपा पार्टी से बनता आ रहा है। लेकिन इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह पैंतरा क्या गुल खिलाता है।

दो बार MLC रहे हैं जयेश प्रसाद
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की गिनती कांग्रेस के कद्दावार नेताओं में होती है और वे राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते है। जितिन प्रसाद के चचेरे भाई जयेश प्रसाद भी राजनिति मे अच्छी पकड़ रखते है। जयेश प्रसाद दो बार एमएलसी रहे चुके है। सबसे पहले उन्होंने बसपा का दामन थाना उसके जब सत्ता बदली तो वह सपा मे आ गए। जयेश प्रसाद राजा भईया के भी बेहद करीबी है। हालांकि इससे पहले विधानसभा चुनाव में जयेश प्रसाद ने सपा से विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए जोर आजमाइश की थी पर ऐसा हुआ नही। जिसके बाद धीरे धीरे जयेश प्रसाद का झुकाव बीजेपी के तरफ होने लगा। अब जब निकाय चुनाव आया तो शाहजहांपुर की शहर नगरपालिका महिला सीट घोषित हुई। जयेश प्रसाद ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से सम्पर्क करना शुरू किया हालांकि उसमे वह कामयाब भी रहे। काफी दिन जयेश प्रसाद और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओ के बीच बैठकों का दौर चलता रहा आखिरकार बीजेपी ने कुंवर जयेश प्रसाद की पत्नी नीलिमा प्रसाद को शहर नगरपालिका सीट का टिकट देकर भरोसा जता दिया। अब जयेश प्रसाद अपनी पत्नी और सैकड़ों समर्थकों के साथ लखनऊ मे नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के सामने बीजेपी का दामन थाम लिया।

कुछ भाजपा कार्यकर्ता मायूस
बीजेपी मे शहर नगरपालिका सीट पर सबसे ज्यादा टिकट के लिए दावेदारी की गई थी। इसमे सबसे ज्यादा वो नेता थे जो काफी सक्रिय भूमिका मे रहते है। उनमें से दो ऐसे नेता है जो एक प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान रखते है तो दूसरा जिले स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। जब जयेश प्रसाद की पत्नी का टिकट क्लियर नही हुआ था तब सभी ने उम्मीद लगा ली थी कि अब टिकट इन दो नेताओं के पास जाएगा। लेकिन बीजेपी ने बाहरी नेता पर भरोसा जता दिया। इस दौरान अच्छी पहचान रखने वाले दोनों नेताओं मे पार्टी के लिए नाराजगी भी देखनी को मिली थी। लेकिन नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार ने सूझबूझ के साथ दोनो नेताओं को मना लिया। लेकिन अभी भी कही न कही बीजेपी में अंर्तकलह देखने को जरूर मिल जाएगी।

सोनिया गांधी के खिलाफ लड़ा था चुनाव
बता दें कि शाहजहांपुर की नगरपालिका सीट पिछले दो बार से सपा की झोली मे रही है। यहां से तनवीर खान पिछले दस साल से इस सीट पर कब्जा जमाएं हुए है। तनवीर खान अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाते है। ऐसे मे देखना होगा कि जिस तरह से बीजेपी ने अपने पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा न करके बाहरी नेता पर भरोसा दिखाकर टिकट दिया तो क्या इस बार नगरपालिका सीट सपा से छीन भी पाते है या नही ये देखने वाली बात होगी। वहीं अगर जितिन प्रसाद के परिवार की बात करें तो उनके पिता स्वर्गीय कुंवर जितेंद्र प्रसाद, प्रधनमंत्री राजीव गांधी और पीवी नरसिंहा राव के राजनीतिक सलाहकार के साथ साथ कई बार मंत्री भी रहे। यहां तक कि जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी लड़े। वहीं कुंवर जितिन प्रसाद ने पिता की मृत्यु के बाद राजनीति को आगे बढ़ाते हुए अच्छा मुकाम हासिल किया है।












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