यूपी चुनाव में काफी कुछ दांव पर मायावती के लिए

यूपी के चुनाव में मायावती के लिए रेस में बने रहना बड़ी चुनौती, शीर्ष पर बने के लिए मायावती झोंक रहीं हैं अपनी पूरी ताकत।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव में मायावती इस बार किसी भी कीमत पर सत्ता से दूर नहीं रहना चाहती है और इसकी शुरुआत उन्होंने सबसे पहले पार्टी के भीतर 100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने से शुरु की जिसके बाद उन्होंने उन तमाम मुद्दो को अपनी रैलियों में लोगों के सामने रखा जिसे लेकर उनकी आलोचना होती रही है। मायावती अपनी हर रैली में यह कहती है कि वह फिर से सरकार में आने के बाद मूर्ति और स्मारक का निर्माण नहीं करेंगी, क्योंकि यह सारे काम उनकी पहली सरकार के कार्यकाल में ही पूरे हो चुके हैं।

हर तरह के वायदों से सजी मायावती की रैली

हर तरह के वायदों से सजी मायावती की रैली

मायावती अपनी रैलियों में समाजवादी सरकार पर जमकर हमला बोलती हैं, गोरखपुर की रामगढ़ रैली में उन्होंने एक बार फिर से अलग पूर्वांचल राज्य का मुद्दा उठाया और वायदा किया कि वह इसकी वकालत करेंगी। मायावती अपनी रैलियों में मोबाइल फोन और लैपटॉप नहीं देने की बात भी करती हैं, वह इसकी जगह लोगों को आर्थिक सहायता देने की बात कहती हैं जिससे कि लोग अपनी जरूरत के अनुसार चीजें खरीद सके, बुनकर और गरीब किसानों को एक लाख रुपए तक का लोन देने का भी वायदा करती हैं।

सपा-भाजपा दोनों निशाने पर

सपा-भाजपा दोनों निशाने पर

मायावती अपनी रैलियों में वायदा करती हैं कि वह आपके बच्चे को पका हुआ घटिया खाना नहीं देंगी, बल्कि उन्हें दूध, बिस्कुट, चना, फल, अंडा और केक देने की बात करती हैं। मायावती अपनी रैलियों में तमाम बातें गरीबों के लिए करती हैं, वह कहती हैं कि वह किसानों को एक बार फिर से पट्टे पर जमीन खेती के लिए देंगी, वो कहती हैं कि दलितों और गरीबों की जमीन पर सपा के कार्यकाल में कब्जा हुआ है ,वह उन्हें वापस दिलाएंगी और कब्जा करने वालों को जेल भेजेंगी।

2012-2014 के नतीजे मायावती के लिए चिंताजनक

2012-2014 के नतीजे मायावती के लिए चिंताजनक

ऐसे में मायावती की तमाम रैलियों से यह साफ है कि वह 2012 की हार के बाद 2014 में जिस तरह से भाजपा मजबूत पार्टी के रूप में प्रदेश में उभरी है उसे किसी भी तरह से हल्के में नहीं लेना चाहती हैं और खुद की पार्टी को किसी भी कीमत पर एक बार फिर से खड़ा करना चाहती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एक तरफ जहां वह सपा पर हमला बोलती हैं और मुसलमानों को इनके झांसे में नहीं आने की बात कहती हैं तो दूसरी तरफ वह मुसलमानों को यह भी समझाती हैं कि अगर सपा-कांग्रेस को वोट दिया तो भाजपा सत्ता में आ जाएगी और अल्पसंख्यकों, दलितों का आरक्षण खत्म हो जाएगा।

इस चुनाव में मायावती के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती है वह यह कि वह किसी भी कीमत पर तीसरे पायदान पर ना खिसके, जिस तरह से 2014 में मायावती को एक भी सीट हासिल नहीं हुई और उनकी पार्टी तीसरे पायदान पर चली गई उसे लेकर मायावती पूरी तरह से सतर्क हैं और पहली बार उन्होंने 100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है।

सपा के वोट बैंक में सेंधमारी

सपा के वोट बैंक में सेंधमारी

जो भाजपा का वोट बैंक नहीं हैं जिसमें दलित, कुछ नाराज यादव, उनके पास बसपा के साथ जाने का वाजिब कारण हैं। दलित युवक कुलदीप कुमार का कहना है कि कॉस्टेबल की भर्ती में अधिकतर पद यादवों को दिए गए, वह यादव राज को कोसते हुए कहते हैं कि बाकी जातियों को दरकिनार किया गया। कॉट्रैक्टर का कहना है कि अगर लोगों को लैपटॉप देने की बजाए कारखाने औऱ फैक्ट्री लगाई गई होती तो हजारों लोगों को रोजगार मिलता।

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