लोगों को 'हिन्दुत्व' से कनेक्ट करने का योगी का प्लान, जिलों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
लखनऊ, 25 अगस्त: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद यूपी में कई जिलों के नाम बदले गए थे। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया जबकि फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किया गया। इसके साथ ही मुगलसराय का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय नगर कर दिया गया था। दरअसल योगी सरकार की प्लानिंग विधानसभा चुनाव से पहले लोगों को हिन्दुत्व से कनेक्ट करने की है। इस लिहाज से भाजपा की सरकार उन लंबित प्रस्तावों पर विचार कर रही है जिनके तहत कई जिलों के नाम बदलने की मांग की गई थी। बताया जा रहा है कि सरकार के स्तर पर इन प्रस्तावों को एकत्र करने की कवायद शुरू कर दी गई है। सरकार सितम्बर के पहले पहले सप्ताह में इस पर ठोस फैसला ले सकती है।

जिलों के नाम बदलने के कई मामले सामने आए
अलीगढ़ की नवगठित जिला पंचायत समिति की दूसरी बैठक नवनिर्वाचित अध्यक्ष विजय सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में हुई थी। बैठक में सदस्य केहरी सिंह और उमेश यादव ने प्रस्ताव किया कि अलीगढ़ जिले का नाम बदलकर हरिगढ़ कर दिया जाए, जिसमें सभी सदस्यों ने सहमति दी थी। इसके बाद अध्यक्ष विजय सिंह ने नाम परिवर्तन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा।
मैनपुरी में को मयंपुरी करने की मांग
ऐसा ही एक प्रस्ताव मैनपुरी जिले में भी लाया गया था। साथ ही 16 अगस्त को अध्यक्ष अर्चना भदौरिया की अध्यक्षता में नवगठित जिला पंचायत समिति ने एक प्रस्ताव देखा जिसमें जिले का नाम बदलकर मयंपुरी करने की मांग की गई। हालांकि, एक प्रस्ताव पारित नहीं किया जा सका, क्योंकि कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए समय मांगा। हालांकि मैनपुरी के एक महाविद्यालय में वरिष्ठ शिक्षक रमाशंकर सिंह कहते हैं, "मैनपुरी का नाम पहले मय ऋषि की तपोभूमि के कारण मय पुरी रखा गया था। इस भूल को योगी सरकार को सुधार करना चाहिए। सरकार को उन सभी जिलों के नाम बदलने चाहिए जिनके नाम मुगल काल के दौरान जानबूझकर बदल दिए गए।"
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि,
'' जिन जिलों के नाम बदलने को लेकर प्रस्ताव आए थे। उनको एकत्र किया जा रहा है। पिछले साढे़ चार साल में बहुत सारे प्रस्ताव आए हैं। उन प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी और सबको मिलाकर एक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। जिलों के नाम बदलेंगे या नहीं इस पर कोई भी अंतिम फैसला सीएम को ही लेना है।''
गाजीपुर का नाम गाधिपुरी करने की मांग
इसी तरह गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से बीजेपी विधायक अलका राय ने गाजीपुर का नाम बदलकर गाधीपुरी करने की मांग की है। अलका राय के अनुसार, यह शहर प्राचीन भारत में महर्षि विश्वामित्र के पिता राजा गढ़ी की राजधानी थी और बाद में इसका नाम मोहम्मद बिन तुगलक के एक सहयोगी के नाम पर रखा गया। अलका राय कहती हैं,
"हम मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर धारा नगर करने पर भी जोर देंगे क्योंकि इस क्षेत्र का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।"
नाम के सहारे लोगों को हिन्दुत्व से जोड़ने की कोशिश
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जिलों के नाम बदलने की अचानक हुई मांग को राजनीतिक विश्लेषक हिंदुत्व से जोड़ रहे हैं। बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरिशंकर तिवारी कहते हैं,
"ज्यादातर जिले जहां नाम परिवर्तन की मांग की जा रही है, जो मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। हिंदू संतों या पूर्वजों के नाम पर ऐसा करके हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है। आप देखिए कि केवल उन्हीं जिलों का नाम क्यों बदलने की मांग हो रही है जिनके नाम मुस्लिम समुदाय से जुड़े हैं।''
सहारनपुर के देवबंद को देवब्रंद करने की मांग
सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक बृजेश सिंह ने भी देवबंद का नाम बदलकर देवब्रंद करने की मांग की है। देवबंद इस्लामिक मदरसा दारुल उलूम के लिए जाना जाता है। ब्रजेश सिंह के मुताबिक प्राचीन हिंदू शास्त्रों में इस स्थान को देवब्रंद कहा गया है। मैं देवबंद को एक पुराना नाम देने की कोशिश करूंगा शाहजहांपुर के दादरौल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के मुताबिक उनके क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि शाहजहांपुर का नाम शाजीपुर रखा जाए, जो महाराणा प्रताप के करीबी भामाशाह का दूसरा नाम है।












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