Manipur में महिलाओं के साथ हुई हैवानियत पर भड़के अखिलेश और Mayawati, ट्वीट कर कहा- 'संस्कृति का पाताल-पतन'
Manipur News: पिछले कई दिनों से मणिपुर हिंसा की आग में इस कदर जल रहा है कि वहां के लोगों ने अपने अंदर की इंसानियत भी शायद मार दी है। मार-काट की खबरों के बीच मणिपुर से बुधवार 19 जुलाई को ऐसी खबर सामने आई कि देश का सिर भी शर्म से झुक गया।
दरअसल, यहां कूकी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त कर सड़क पर नग्न परेड कराई गई। कुछ सेकंड के इस वीडियो में नजर आ रहा था कि भीड़ ने उन महिलाओं के साथ यौन हिंसा कर खेतों की तरफ लेकर जा रही है।

घटना का भयावह वीडियो सामने आने के बाद जहां लोगों में गुस्सा दिखाई दे रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर रोक लगा दी है। इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी बीजेपी सरकार पर हमलावर है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीम मायावती ने मणिपुर में दो महिलाओं के साथ हुई हैवानियत पर हुए इसे सभ्यता का चीरहरण बताया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, 'मणिपुर में सभ्यता का चीरहरण हुआ है और संस्कृति का पाताल-पतन।' इतना ही नहीं, उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा,
मणिपुर के हालात के लिए आरएसएस (RSS) की नफ़रत की नीति और भाजपा की वोट की राजनीति ज़िम्मेदार है। बहन-बेटियों के परिवारवाले अब तो भाजपा की ओर देखने तक से पहले एक बार ज़रूर सोचेंगे।
वहीं, बीएसपी सुप्रीमो और यूपी की पूर्व सीएम मायवाती ने ट्वीट करते हुए इस घटना की निंदा की और बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा,
मणिपुर में अनवरत जारी हिंसा व तनाव से पूरा देश चिन्तित है तथा महिला के साथ अभद्रता की ताजा घटना खासकर भाजपा व उनकी सरकार को शर्मसार करने वाली है। वैसे तो राज्य में कानून-व्यवस्था काफी पहले से चरमराई हुई है, किन्तु क्या बीजेपी अभी भी ऐसे मुख्यमंत्री को संरक्षण देती रहेगी?
मणिपुर में हुई इस घटना पर राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया है। जयंत चौधरी ने कहा,
मणिपुर का वीडियो भयावह और बेरोकटोक सांप्रदायिक हिंसा से संकेत मिलता है कि इंटरनेट शटडाउन का आदेश जमीनी स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने और प्रबंधित करने के बजाय विफलताओं से उत्पन्न राजनीतिक नतीजों को प्रबंधित करने के लिए दिया गया था!
आखिर क्या है मणिपुर हिंसा?
बता दें कि मणिपुर में 3 मई को दो आदिवासी समुदाओं मैतेई और कुकी के बीच जातीय झड़प हो गई थी। मणिपुर में आदिवासियों को लेकर कुछ खास कानून हैं, जिसके तहत वे पहाड़ी इलाकों में रह सकते हैं। वहीं, मैतई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न मिलने के कारण वो पहाड़ी इलाकों में नहीं बस सकते हैं। जिसके लिए मैतई समाज खुद को अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल करवाने की मांग कर रही है।












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