डायरेक्टर को भाजपा का टिकट दिलाने फर्रुखाबाद आया एक्टर, सभा में 100 लोग नहीं जुटे!
फर्रुखाबाद। फिल्म डायरेक्टर सन्दीप बाथम को देश के सबसे बड़े सियासी दल भाजपा का टिकट दिलाने एक्टर किरण कुमार फर्रुखाबाद पहुंच गए। यहां दोनों ने कोई विशेष सुरक्षा नहीं मांगी और अपने समर्थकों को जुटाने की कोशिश की। मगर, यह क्या वह भीड़ तो उनके पास आई ही नहीं। इस पर किरण कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करना ही बेहतर समझा। किरण ने कहा कि मैं सियासी दल का प्रवक्ता बनने नहीं आया, लेकिन नरेंद्र भाई मोदी को समझता हूं। मोदी जी ने गुजरात से दिल्ली पहुंचकर देश का परचम फहराया है।

एक्टर किरण कुमार ने ऐसे मांगा समर्थन
मौके पर मौजूद लोगों को देख किरण कुमार ने आगे कहा, 'मैं फर्रुखाबाद में सन्दीप बाथम से मिलने नहीं आया, बल्कि आप सभी से मिलने आया हूं। 2018 खत्म होने को है, 2019 आने वाला है। मेरा देश की जनता से अनुरोध है कि उस आने वाले वर्ष में बहुत ही महत्वपूर्ण फैसले लेने हैं, जिससे आपके परिवार से लेकर बच्चों का भविष्य अच्छा बन सके। ऐसे में कायमगंज के रहने वाले सन्दीप बहुत कुछ कर सकते हैं।''

नहीं जुटी भीड़, मंच पड़ा रहा खाली
कायमगंज में गेस्ट हाउस से सटे मंच पर जब उम्मीदों की भीड़ नहीं जुटी तो एक्टर ने मीडिया से बात ही करने से मना कर दिया। बताते चलें कि इस कार्यक्रम में किरण कुमार के लिए जो मंच तैयार किया गया था, वहां एक हजार से अधिक लोगों के आने का इंतजाम किया गया था। लेकिन पूरे कार्यक्रम में सौ से ज्यादा लोगों की भी भीड़ दिखाई नहीं दी। ग्राउंड खाली पड़ा रहा।

गुजरात में मैंने 80 फिल्मों में काम किया
किरण ने कहा, ''आप अपना वोट किसे देते हैं, ये मैं तो नहीं बता सकता, मैं नही बताऊंगा। फैसला आप लोगों को करना है। गुजरात में मैंने 80 फिल्मों में काम किया है। मुझे लोग गुजरात-किंग कहते हैं। अब सन्दीप बाथम टिकट लेकर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, तो मुझे बाथम के चेहरे पर जनता की सेवा करने की सच्चाई दिखी। मेरा मानना है इनको एक मौका देना चाहिए।भाजपा के जो ऊपर लीडर बैठे हैं, वह इस भावी उम्मीदवार की तरफ देखकर फैसला करें।'

'तेजाब' का डायलॉग भी सुनाया
इस दौरान किरण ने अपनी एक फ़िल्म 'तेजाब' का डायलॉग भी सुनाया। वह डायलॉग है- 'लोटिया पठान एक ही मकशद के लिए जिंदा है, वो है मुन्ना की मौत!''
इसके अलावा भी कई बातें कहकर लोगों को लुभाया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में नायक की प्रसिद्धि के पीछे खलनायक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।












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