यूक्रेन संकट: भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा असर

Provided by Deutsche Welle

नई दिल्ली, 25 फरवरी। इस समय भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जो सालाना करीब 150 अरब डॉलर है. कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों पर सीधा असर होगा. हालांकि भारतीय तेल कंपनियों ने फिलहाल तेल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है.

सितंबर 2014 के बाद पहली बार गुरूवार 24 फरवरी को कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाकर 105 तक जा पहुंचा था. रूस और यूक्रेन में तनाव अक्टूबर 2021 में बढ़ना शुरू हुआ, उस वक्त क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल पर था, उस वक्त से लेकर अब तक इसकी कीमत में करीब 24 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई है. लेकिन भारत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर है. इन चुनावों के परिणामों का ऐलान 10 मार्च का होगा. ऐसे में अंदेशा है कि परिणाम के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ेंगे.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के वरिष्ठ एनालिस्ट भानु पाटनी के मुताबिक, "कच्चे तेल की इतनी ऊंची कीमतों से खुदरा ईंधन की कीमतों में करीब 8-10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी और इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है."

संकट का आम आदमी पर असर

रूस और यूक्रेन के बीच तनाव का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला. गुरूवार को डॉलर के मुकाबले रुपये एक फीसदी कमजोर हुआ. केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और उसके बाद राज्यों ने भी अपने यहां लगने वाले वैट में कटौती की थी.

जानकारों का कहना है कि यूक्रेन संकट का सीधा असर भारत की आम जनता पर भी पड़ेगा. पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद्य तेल और गेहूं जैसी कमोडिटीज महंगी होंगी. प्राकृतिक गैस महंगी होने से फर्टिलाइजर, बिजली और ऐसे सभी रसायनों के दाम बढ़ेंगे जिनके उत्पादन में गैस का इस्तेमाल होता है.

यूक्रेन और रूस दोनों हैं भारत के लिए अहम

पूरी दुनिया में रूस अकेले 12 प्रतिशत के करीब कच्चे तेल का उत्पादन करता है. बाकी देशों के अलावा भारत रूस से कच्चा तेल, गैस, सैन्य उपकरण आदि खरीदता है. पिछले साल दोनों देशों के बीच करीब 8 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार हुआ था. रूस ही नहीं भारत और यूक्रेन के बीच भी अच्छे कारोबारी रिश्ते हैं. एशिया प्रशांत में यूक्रेन सबसे अधिक भारत को ही निर्यात करता है. भारत यूक्रेन से दवा, मशीन, रसायन, पॉलिमर और खाने का तेल खरीदता है.

ऐसे में रूस और यूक्रेन के बीच जो संकट खड़ा हुआ है उसका दायरा सिर्फ दो देशों के बीच सीमित नहीं बल्कि यह काफी बड़ा है, संकट को जल्द सुलझा लेने से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी से उतरने से रोका जा सकता है, जो पहले ही कोरोना महामारी की वजह से कमजोर स्थिति में है.

Source: DW

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