उज्जैन संभाग और ओबीसी से ही क्यों मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री, मोहन यादव के CM बनने की वजह?
Mohan Yadav MP New CM: मध्य प्रदेश में आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने ओबीसी नेता को मुख्यमंत्री बना दिया है। शुरू से ही मध्य प्रदेश की राजनीति में माना जा रहा था कि क्या मध्य प्रदेश की राजनीति में साल 2023 के चुनाव के बाद जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला तो क्या मध्य प्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री होगा। अब इस पर अंतिम फैसला आ गया है और विधायक दल की बैठक में ओबीसी क्षेत्र से आने वाले डॉक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया गया है।
उज्जैन दक्षिण से लगातार 3 चुनाव जीते 58 वर्षीय मोहन यादव ने मंत्री बनने के बाद सीधे एमपी सीएम की छलांग लगा दी है। मोहन यादव मध्य प्रदेश में भाजपा का बड़ा ओबीसी चेहरा हैं। उनके नाम की घोषणा संभवत 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए की गई है।

मोहन यादव की शैक्षणिक योग्यता पीएचडी है। 58 साल मोहन यादव का राजनीतिक करियर एक तरह से 1984 में शुरू हुआ जब उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे। वह आरएसएस के भी सदस्य हैं। उन्होंने 2013 में उज्जैन दक्षिण से किस्मत अजमाया और लगातार तीसरे चुनाव में यहां से विधायक बन गए। इस बार उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी चेतन प्रेम नारायण यादव को 12941 वोटों से हराया था। मोहन यादव को 95699 वोट मिले थे।
मोहन यादव ओबीसी समाज से हैं। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में यादव की राजनीति का खासा असर है। इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा आलाकमान ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर लंबी राजनीतिक लकीर खींचने की कोशिश है। भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद है कि मोहन यादव का चेहरा 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और बिहार में खासा असर डाल सकता है।
मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर 2024 के लिए उत्तर के दो बड़े राज्यों को संदेश दिया है। जहां लोकसभा की 120 सीटें हैं और यादव ओबीसी में यादव मतदाता एक निर्णायक वोट बैंक है।
भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में नई पीढ़ी की राजनीति की शुरुआत करने की कोशिश की है। मोहन यादव महज 58 साल के हैं। इससे भाजपा ने मैसेज देने की कोशिश की है कि वह राज्य में सेकेंड लाइन नेतृत्व तैयार करने को लेकर तैयारी में है।












Click it and Unblock the Notifications