Ujjain News: मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूरवाड़ी में बवाल, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश, लाठीचार्ज में पुलिसकर्मी घायल
MP News Ujjain: मध्य प्रदेश के पवित्र नगरी उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान रविवार को अचानक हंगामा मच गया। खजूरवाड़ी मस्जिद के पास जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस द्वारा निर्धारित मार्ग की अवहेलना करते हुए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की।
इस दौरान एक प्रतीकात्मक घोड़े को बैरिकेड्स में घुसाने का प्रयास किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस और जुलूस के प्रतिभागियों के बीच हुई झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन को हिलाकर रख दिया, बल्कि शहर में तनाव का माहौल भी पैदा कर दिया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
उज्जैन में हर साल की तरह इस बार भी मुहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस की शुरुआत सुबह इमामबाड़ों से हुई, जिसमें हजारों लोग शामिल थे। ताजिए, परचम, और प्रतीकात्मक घोड़े (बुर्राक) के साथ जुलूस शहर के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजर रहा था। पुलिस प्रशासन ने जुलूस के लिए पहले से ही एक निर्धारित मार्ग तय किया था, और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में जुलूस नहीं ले जाया जाए।
हालांकि, खजूरवाड़ी मस्जिद के पास जुलूस उस मार्ग की ओर बढ़ने लगा, जिसे प्रशासन ने प्रतिबंधित घोषित किया था। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के अनुसार, "आयोजकों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जुलूस को निर्धारित मार्ग पर ही रखा जाए। इसके बावजूद, कुछ लोग जुलूस को प्रतिबंधित रास्ते पर ले गए और बैरिकेड तोड़ने के लिए एक प्रतीकात्मक घोड़े का इस्तेमाल किया।"
इस दौरान जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने बैरिकेड्स पर धक्का-मुक्की शुरू कर दी, और एक घोड़ा बैरिकेड्स से टकरा गया, जिससे वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को धक्का लगा। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने पहले मौखिक चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी, तो लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में पांच पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, जिनमें से कुछ को मामूली चोटें थीं, और उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस की कार्रवाई: 16 लोगों पर मामला दर्ज
उज्जैन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के बाद सख्त रुख अपनाया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि जुलूस के आयोजकों सहित 16 लोगों के खिलाफ भादंसं (BNS) के तहत दंगा करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। "हमने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी," शर्मा ने कहा।
पुलिस ने खजूरवाड़ी मस्जिद के पास जिवाजीगंज थाना क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है, ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो। स्थिति अब नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है।
जुलूस में क्या हुआ? प्रत्यक्षदर्शियों का बयान
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जुलूस में हजारों की संख्या में लोग शामिल थे, और माहौल शुरू में शांतिपूर्ण था। "हुसैन-या हुसैन" के नारे और ढोल-ताशों की गूंज के बीच जुलूस खजूरवाड़ी मस्जिद की ओर बढ़ रहा था। लेकिन जैसे ही जुलूस प्रतिबंधित मार्ग की ओर मुड़ा, पुलिस ने बैरिकेड्स के जरिए रास्ता रोकने की कोशिश की।
एक प्रत्यक्षदर्शी, मोहम्मद राशिद, ने बताया, "कुछ लोग जुलूस को पुराने रास्ते से ले जाना चाहते थे, जो पहले से प्रतिबंधित था। पुलिस ने जब रोका, तो बहस शुरू हो गई। अचानक कुछ लोगों ने बैरिकेड्स की ओर धक्का देना शुरू किया, और घोड़ा भीड़ में फंस गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।"
वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी, रमेश ठाकुर, ने कहा, "यह जुलूस हर साल शांतिपूर्वक निकलता है, लेकिन इस बार कुछ लोगों ने नियम तोड़ने की कोशिश की। पुलिस को मजबूरन सख्ती करनी पड़ी।"
प्रशासन की तैयारियां और विवाद का इतिहास
उज्जैन में मुहर्रम जुलूस की तैयारियों के लिए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ड्रोन निगरानी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ जुलूस के मार्ग को सावधानीपूर्वक तय किया गया था। पिछले वर्ष भी उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक हादसा हुआ था, जब एक प्रतीकात्मक घोड़ा (बड़े साहब) गिर गया था, जिसके कारण छह लोग घायल हो गए थे। उस समय भी पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।
यह घटना उज्जैन में धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले विवादों का एक और उदाहरण है। इससे पहले 2021 में, उज्जैन के भाजी बाजार क्षेत्र में मिलाद-उन-नबी जुलूस के दौरान भी बैरिकेड तोड़ने और पथराव की घटना हुई थी, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इन घटनाओं ने प्रशासन के सामने धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
पुलिस अधीक्षक का बयान
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने घटना पर खेद जताते हुए कहा, "मुहर्रम जुलूस एक पवित्र और शांतिपूर्ण आयोजन है, और हम इसका सम्मान करते हैं। लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। आयोजकों को पहले ही मार्ग के बारे में सूचित किया गया था। बैरिकेड तोड़ने और पुलिस पर हमले की कोशिश के बाद हमें सख्ती करनी पड़ी।" उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
उज्जैन, जो मुख्यमंत्री मोहन यादव का गृह जिला है, में इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। कुछ स्थानीय नेताओं ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने कहा, "प्रशासन को जुलूस के आयोजकों के साथ बेहतर समन्वय करना चाहिए था। इस तरह की घटनाएं शहर की शांति को भंग करती हैं।"
वहीं, एक भाजपा नेता ने कहा, "पुलिस ने स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया, वरना हालात और बिगड़ सकते थे। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
मुहर्रम का महत्व और उज्जैन की परंपरा
मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है, और इसकी 10वीं तारीख को आशूरा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की करबला में शहादत की याद में मातम और जुलूस के साथ मनाया जाता है। उज्जैन में मुहर्रम जुलूस की परंपरा दशकों पुरानी है, और हर साल हजारों लोग इसमें शामिल होते हैं। ताजिए, परचम, और प्रतीकात्मक घोड़े इस जुलूस का अभिन्न हिस्सा हैं।
हालांकि, इस बार की घटना ने इस पवित्र आयोजन पर एक दाग छोड़ दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर संवाद से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
रिपोर्टर: लक्ष्मी नारायण मालवीय | वन इंडिया हिंदी |
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