श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली पर जन्माष्टमी का उल्लास, यहीं लिया था 64 विधाओं और 16 कलाओं का ज्ञान

उज्जैन, 18 अगस्त: देशभर में जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है, जहां श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हुए नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि, देश भर में विराजमान भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम पर भी नजर आ रही है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम के दर्शन के लिए धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे हैं।

श्री कृष्ण को मिली थी जगतगुरु की उपाधि

श्री कृष्ण को मिली थी जगतगुरु की उपाधि

जगतगुरु भगवान श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षा धार्मिक नगरी उज्जैन से ही प्राप्त की थी। जहां महर्षि सांदीपनि के आश्रम में 64 दिन रहकर भगवान कृष्ण ने 64 विधाओं और 16 कलाओं का ज्ञान हासिल किया था। बात, 5 हजार वर्ष पुरानी है, जब भगवान श्रीकृष्ण, उनके सखा सुदामा और भाई बलराम ने सांदिपनी आश्रम ने शिक्षा ग्रहण की थी। यही नहीं, उनके गुरु महर्षि सांदिपनी श्रीकृष्ण की लगन और मेहनत से इतने प्रभावित हुए कि, उन्हें जगत गुरु की उपाधि दी। तभी से श्रीकृष्ण पहले जगत गुरु माने गए।

बिल्वपत्र के माध्यम से शिवलिंग प्रकट हुआ

बिल्वपत्र के माध्यम से शिवलिंग प्रकट हुआ

गुरु सांदीपनि ने अपनी कठिन तपस्या से बिल्वपत्र के माध्यम से शिवलिंग प्रकट किया था। इन्हें ही सर्वेश्वर महादेव के नाम से जानते हैं। गोमती कुंड के समीप ही इस मंदिर में भगवान शिव की दुर्लभ प्रतिमा है, जिसके दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से आश्रम आते हैं। जन्मष्टमी पर यहां भगवान कृष्ण और गुरु सांदीपनि का आकर्षक श्रृंगार किया गया है। साथ ही पूरे मंदिर को सजाया गया है, जहां श्री कृष्ण की इस पाठशाला में उनके बाल रूप के दर्शन करने दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।

भाई बलराम के साथ ग्रहण की शिक्षा

भाई बलराम के साथ ग्रहण की शिक्षा

सांदीपनि आश्रम के पुजारियों की मानें तो भगवान श्री कृष्ण भाई बलराम के साथ गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण करने आए थे, जहां उन्होंने 64 दिनों में संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति की थी। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने 64 विधाओं और 16 कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया था। इन कलाओं में गीत कला, नृत्य कला, नाट्य कला, वाद्य कला के साथ-साथ कई अन्य कलाएं भी शामिल थी।

दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे

दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे

जगतगुरु भगवान श्री कृष्ण की पाठशाला यानी महर्षि सांदीपनि के आश्रम में भी जन्माष्टमी पर्व का उल्लास देखा जा रहा है, जहां भगवान श्री कृष्ण रात बारह बजे जन्म लेकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे। वही जन्माष्टमी के अति पावन अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का दर्शन करने सांदीपनि आश्रम पहुंच रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

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