गांव के लड़के को जापान सरकार 62 लाख रुपए देने को तैयार, इसके प्रोजेक्ट को मिले 28 अवार्ड

Udaipur News, उदयपुर। फिल्म थ्री इडियट के फुंसुक वांगड़ू को कौन भूल सकता है। उन्होंने अपनी देसी तकनीक से कई आविष्कार किए। उसी तर्ज पर मिलिए राजस्थान के 'फुंसुक वांगड़ू' से, जिसने कमाल कर दिखाया है। दावा है कि उसके प्रोजेक्ट की जापानी की सरकार भी दीवानी हो गई है और जापान में उसका प्रोजेक्ट शुरू इच्छा जताई है।

सपने को पूरा होने में 4 वर्ष लगे

सपने को पूरा होने में 4 वर्ष लगे

राजस्थान के राजसमन्द जिले के करेड़ी गॉंव के रहने वाले इस युवा के इस सपने को पूरा होने में 4 वर्ष लगे हैं। नारायण गुर्जर जब कक्षा 11वीं में अध्यनरत था तभी किसानों को पानी की समस्या से जूझते हुए देखा। इस दौरान ही नारायण ने अपने परिजनों के सहयोग और हौसला अफजाई से सूखे पर काम करने की ठानी।

ऐसे काम करता है प्रोजेक्ट

ऐसे काम करता है प्रोजेक्ट

नारायण के इस प्रोजेक्ट में सब्जियों, फलों और फसलों के अपशिष्ट पदार्थ का मिश्रण है, जिसमें गन्ने के छिलके, वेस्ट सब्जियां और फलों को शामिल कर इसका एक सूखा मिश्रण बनाया गया है। प्रोजेक्ट को बंजर जमीन, कम बारिश और सूखे से ग्रस्त इलाकों में आसानी से काम में लिया जा सकता है। यही नहीं इस प्रोजेक्ट को मिट्टी के साथ मिलाकर जमीन में डाला जा सकता है, जो पानी को सरक्षित कर सकता है। जब प्लांट को पानी की जरूरत हो तो तब वह इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पानी की पूर्ति कर सकता है।

लम्बे समय तक नमी बनाए रखता है

लम्बे समय तक नमी बनाए रखता है

नारायणलाल ने बताया कि उन्होंने वेस्ट मेटेरियल से वाटर रिटेशन का सिस्टम इजाद किया। जो बंजर और सूखी जमीन में प्रयोग करने पर मृदा में लम्बे समय तक नमी बनाए रखता है। इससे फसल सूखती नहीं है और यह नवाचार कम पानी में अधिक पैदावार देने के लिए सहायक है।

एक साल के मिलेंगे 62 लाख रुपए

एक साल के मिलेंगे 62 लाख रुपए

नारायण को इस प्रोग्राम के खत्म होने के बाद जापान सरकार इसकी कम्पनी को जापान में ही शुरू करने का अवसर प्रदान करेगी। कम्पनी शुरू करने के लिए जापान सरकार आर्थिक सहायता देगी, जिसमें एक साल के लिए 62 लाख रुपए प्रदान किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को मुकाम तक पहुंचाने वाले नारायण के मेन्टर डॉ. एसएम माथुर ने बताया कि इस प्रोग्राम में चयन प्रक्रिया चार माह तक चली। पर्सनल इंटरव्यू, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से इंटरव्यू हुए। नारायणलाल व उनकी टीम में शामिल शशि प्रताप सिंह और अंकित जैन को शुरू में न्यूजेन आईडीसी की ओर से प्रोजेक्ट के लिए ढाई लाख रुपए की सहायता दी गई थी।

मिले दर्जनों पुरस्कार

मिले दर्जनों पुरस्कार

नारायण लाल ने टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्युबेशन सेंटर में इकोफ्रेंडली पालीमार कंपनी पढ़ाई के साथ शुरू की। नारायणलाल को इस कार्य के लिए 25 नेशनल और तीन इंटरनेशनल अवार्ड मिल चुके हैं। हाल ही में लंदन में आयोजित लीडरशिप इनोवेशन फैलोशिप में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। ऐसे में नारायण के इस नवाचार के बाद उन्हें भी एक सुखद अनुभूति हो रही है।

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