लाशें आने से पहले ही श्मशान में लगीं 40 चिता, वायरस से खत्म हो रही जिंदगियों पर गुजरात की डरावनी 'सूरत'
सूरत। यह तस्वीर है गुजरात में सूरत जिले के श्मशान घाट की। जगह-जगह खुले में चिताएं लगी हुई हैं। इन चिताओं को कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया गया है। लाशें अभी श्मशान लाई नहीं गईं, लेकिन चिता के लिए लकडि़यों का झुरमुठ पहले ही लगा दिया गया है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने कहा कि, इससे डरावना दृश्य और क्या होगा।

सूरत के श्मशान घाट से डरावनी तस्वीर
दरअसल, श्मशान में चिता फूंकने वाले कर्मियों को बिल्कुल फुरसत नहीं है। रोज सूरतभर में सैकड़ों लोगों की लाशों को या तो जलाया जा रहा है या फिर दफनाया जा रहा है। श्मशान में एक कर्मी ने कहा कि, सूरत के तीन प्रमुख श्मशान घाट लाशों से भरे हैं और जिन लोगों की जान कोरोना से गई है, उनके परिजनों को अंतिम संस्कार की विधि पूरी करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले एक जगह तो लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस ही नहीं मिली। ऐसे में लाश को परिचित ठेले पर लादकर ले गया।

अंतिम संस्कार के लिए श्मशान भी कम पड़ रहे
सूरत स्थित एक श्मशान घाट के संचालक ने कहा कि, इन दिनों गुजरात के सूरत और अहमदाबाद शहरों में कोरोना महामारी की वजह से कोहराम मचा हुआ है। इन शहरों में कोरोना के इतने मरीज मिल रहे हैं कि व्यवस्था खाक चाट रही हैं। लोगों की जानें भी ज्यादा जा रही हैं, ऐसे में श्मशान भी अंतिम संस्कारों के लिए कम पड़ रहे हैं। उसने कहा कि, अकेले सूरत में रोजाना 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

बरसों से बंद श्मशान भी चालू कराए गए
संचालक के मुताबिक, इन दिनों लोगों को 8-10 घंटे तक भी इंतजार करना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रशासन ने पिछले 15 वर्षों से बंद पड़े एक श्मशान को फिर से शुरू करवाया। इससे पहले भी शहर के तीन प्रमुख श्मशानों की सीमाओं का विस्तार करने और अंतिम संस्कार को सुविधाजनक बनाने की कवायद की गई। हाल ही तीन और श्मशान घाट आॅपरेशनल हुए हैं।" अहमदाबाद और राजकोट सिविल अस्पतालों की तस्वीरें सबने देखी ही होंगी। एंबुलेंस की रोज लंबी कतारें लग रही हैं।












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