गुजरात में सूरत की केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 12 फायर टेंडर मौके पर
सूरत। गुजरात में सूरत के सचिन जीआईडीसी इलाके में एक केमिकल फैक्ट्री में शनिवार शाम आग लग गई। यह दुर्घटना इतना भीषण घटी कि, आग की लपटें-धुएं के गुबार कई किमी दूर से दिख रहे थे। केमिकल के जलने की बदबू से लोगों को दिक्कत हुई। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया कि, 12 से अधिक फायर टेंडर मौके पर मौजूद हैं। फायर ब्रिगेड की और गाड़ियां बुलाई जा रही हैं। पानी की बौछार से आग बुझाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

इस इलाके में हर साल होते हैं हादसे
सूरत शहर में बीते साल इन्हीं दिनों भयंकर अग्निकांड हुआ था। तब एक बिल्डिंग में आग लगने से कोचिंग के 20-22 छात्र-छात्राओं की जान चली गई थी। इसी तरह शहर में इस साल भी कई हादसे हो चुके हैं। मार्च महीने में राज्य सरकार ने कहा था कि, गुजरात में पहली बार 5 फायर फाइटर ऑफिस एक्टिव किए गए हैं। खुद मुख्यमंत्री ने 38 नगर पालिकाओं को दमकल गाड़ियां सौंपी थीं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाते हुए कहा था कि, सूरत जैसी त्रासदी न हो पाए, इसके पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा था कि, गुजरात में पहली बार पांच क्षेत्रीय दमकल कार्यालय काम कर रहे हैं।

फायर टेंडर और पिकअप विद ट्रॉली की हुई थी खरीद
राज्य के शहरी विकास विभाग ने 15.42 करोड़ रुपए की लागत से अग्निशमन सेवा के लिए मिनी फायर टेंडर और पिकअप विद फ्रॉम ट्रॉली जैसे 45 वाहनों की खरीदी की। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने खुद 38 नगरपालिकाओं को नई दमकल गाड़ियां सौंपी। उस रोज मुख्यमंत्री गांधीनगर में थे, तो बोले कि नगरपालिकाओं को नागरिकों की सुरक्षा-सुविधा के लिए ये नई दमकल गाड़ियां दी गई हैं।

16 अल्ट्रा हाईप्रेशर मिनी फायर टेंडर भी खरीदे थे
आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए, शहरी विकास विभाग की ओर से नगरपालिकाओं को 16 अल्ट्रा हाईप्रेशर मिनी फायर टेंडर, 22 पिकअप विद फ्रॉम ट्रॉली और 7 रैपिड रिस्पॉन्स व्हीकल भी सरकार ने प्रदान किए थे। ये सब ऐसे उपकरण प्रदान किए गए, जिनके रहते कहीं भी आग लगने की घटनाओं में माल-सामान को कम से कम नुकसान होगा। नगरों और महानगरों में फायर स्टेशन में आधुनिक उपकरण स्थापित करने के लिए इस वर्ष के बजट में 106 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।












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