कश्मीर के नेताओं को महलों तक पहुंचाने वाले खुद रह रहे टेंट में
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में नेताओं को चुनाव जिता कर महलों तक पहुंचने की राह पर लाकर खड़ा करने वाले सैंकड़ों लोग आज भी तम्बू-कनातों में रातें गुजार रहे हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की, जिनके राहत शिविरों पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

तस्वीरों में आप श्रीनगर की बेमिना टेंट कॉलोनी देख सकते हैं जहां पर बाढ़ से बेघर हुये हज़ारों लोग आज कड़ाके की ठण्ड से बेहाल दिखते हैं। दर्जनों जगह सैकड़ों लोग अब भी टेंटों में माइनस तापमान में रहने पर मजबूर हैं। बाढ़ के तुरंत बाद चुनाव हुये और कोड ऑफ़ कंडक्ट के कारण कोई भी रिहैबिलिटेशन नहीं हो सका। नेशनल कॉन्फ्रेंस के इलावा सभी दल चुनाव के हक़ में थे, क्योंकि बाढ़ के बाद की इस्थिति मतदाताओं को रिजने में काफी माददगार थी। लेकिन अब इन बाढ़ पीड़ितों को लगभग सभी नेता भूल गये हैं। सभी इस वक्त कुर्सी की दौड़ में शामिल हैं। सच पूछिए तो अब ऐसा लगने लगा है कि नेताओं ने इन गरीबों के साथ भी छल किया है।

रात का पारा माइनस पांच के नीचे होने के बावजूद ये लोग अपने परिवारों के साथ इन टेंटों में रहने पर मजबूर हैं। आज इनकी कोई नहीं सुनता है और अगर ये शिकायत लेकर फोन करते हैं तो कोई नेता फोन नहीं उठाता।

जिनका फोन अब व्यस्त है, वे वही लोग हैं, जिन्होंने बड़े बड़े वादे किये थे। चुनावों के नतीजे निकल आज दस दिन हुए हैं मगर राज्य में सरकार का गठन नहीं हो पा रहा है। कहीं मुखीमंत्री की कुर्सी अड़चन हैं तो कहीं जम्मू बनाम कश्मीर, तो कही मंत्रालय का झगड़ा। मगर इन सब के बीच इन गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है।

जाहिर है अगर सरकार व नेता इसी तरह इनसे सौतेला व्यवहार करते रहे, तो इसमें कोई शक नहीं कि ये कोई गलत रास्ता अख्तियार कर लें।












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