Vinesh Phogat: 1 रुपये में PAK की धज्जियां उड़ाने वाले हरीश साल्वे अब विनेश को दिलाएंगे मेडल?
Paris Olympics: प्रसिद्ध भारतीय वकील हरीश साल्वे शुक्रवार को पेरिस ओलंपिक से विनेश फोगाट की अयोग्यता के संबंध में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) की सुनवाई में पहलवान का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और किंग्स काउंसल साल्वे ने बताया कि भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने उन्हें इस मामले में नियुक्त किया है। सुनवाई भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगी।
भारतीय पहलवान ने कार्यवाही में वर्चुअली हिस्सा लिया
खेल पंचाट न्यायालय (CAS) ने शुक्रवार को तीन घंटे तक सुनवाई की, जिसमें विनेश फोगट की ओलंपिक से अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ़ उनकी अपील पर विचार किया गया। भारतीय पहलवान ने कार्यवाही में वर्चुअली हिस्सा लिया और न्यायाधिकरण के समक्ष अपना मामला पेश किया।

विनेश को 100 ग्राम वजन के कारण अयोग्य ठहराया
पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट को इसलिए अयोग्य ठहराया गया था, क्योंकि 7 अगस्त को महिलाओं की 50 किग्रा कुश्ती स्पर्धा में स्वर्ण पदक के लिए वजन मापने के दौरान उनका वज़न सीमा से 100 ग्राम अधिक पाया गया था। उनकी कानूनी टीम ने तर्क दिया कि उन्होंने किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं की है, उन्होंने कहा कि उनका वज़न बढ़ना उनके शरीर की रिकवरी प्रक्रिया का स्वाभाविक परिणाम था और इसे प्रतियोगिता नियमों के उल्लंघन के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
हरीश साल्वे ने कभी एक रुपए की फीस में पाकिस्तान को दी मात
आज फिर सुनवाई के दौरा हरीश साल्वे विनेश फोगाट का केस लड़ेंगे। देश के टॉप वकीलों में शुमार हरीश साल्वे वही दिग्गज हैं, जिन्होंने कभी 1 रुपये की फीस लेकर पाकिस्तान की उसकी सही जगह दिखा दी थी।
दादा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हरीश साल्वे
22 जून 1955 को महाराष्ट्र के एक मराठी परिवार में जन्मे हरीश साल्वे ने अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ाया है। उनके पिता केपी साल्वे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में काम करते थे, और उनकी मां, अम्ब्रिती एक डॉक्टर थीं। हरीश ने नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की, इससे पहले उन्होंने ICAI से चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स किया था। उन्होंने नागपुर में सेंट फ्रांसिस डी सेल्स स्कूल में भी पढ़ाई की। उन्होंने एक प्रमुख फर्म के साथ अपने कानूनी करियर की शुरुआत की और दिल्ली उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में काम किया।
कई हाई-प्रोफाइल मामले में शामिल रह चुके हैं साल्वे
हरीश साल्वे के कानूनी करियर में कई हाई-प्रोफाइल मामले शामिल हैं। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी किया और 1992 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता बन गए। वे नवंबर 1999 से नवंबर 2002 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल भी रहे।
बड़ी आसानी से संभाला था कुलभूषण जाधव का मामला
उनके द्वारा संभाले गए प्रसिद्ध मामलों में से एक कुलभूषण जाधव का मामला था, जिसे जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। उस मामले में साल्वे ने कानूनी फीस के रूप में केवल ₹1 लिया। दूसरी ओर इस केस को जीतने के लिए पाकिस्तान ने करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए थे, लेकिन उनके हाथ सिर्फ निराशा लगी। इस केस के लिए पाकिस्तान से यूके के वकील खवार कुरेशी ने 20 करोड़ रुपये की मोटी रकम ली थी।
उनके अन्य प्रमुख मामलों में में टाटा समूह, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटीसी समूह शामिल हैं। साल्वे ने अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड के खिलाफ कृष्णा गोदावरी बेसिन गैस विवाद मामले में उनका प्रतिनिधित्व किया था। 2012 में वोडाफोन की ओर से सरकार के खिलाफ 11,000 करोड़ रुपये के कर मामले में उन्हें बड़ी जीत मिली थी।
पद्म भूषण से सम्मानित हैं हरीश साल्वे
2015 में साल्वे को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उसी वर्ष उन्होंने 2002 के हिट-एंड-रन मामले में सलमान खान का प्रतिनिधित्व किया और दिसंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट से उन्हें बरी करवाया। 2018 में साल्वे कावेरी जल विवाद पर केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। हाल ही में वेल्स और इंग्लैंड की अदालतों ने उन्हें पिछले साल जनवरी में क्वींस काउंसल नियुक्त किया था।












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