Video: कभी मैदान में थे टीम इंडिया के कप्तान, गंगा में बहने से बाल-बाल बचे, कौन हैं दीपक हुड्डा?

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान एशियन गोल्ड मेडलिस्ट और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ी दीपक हुड्डा अचानक तेज बहाव में बह गए। अच्छी बात ये रही कि मौके पर मौजूद उत्तराखंड पुलिस की 40वीं पीएसी बटालियन की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दीपक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

हुड्डा ने स्पोर्टस्टार से बातचीत में बताया कि, 'महाशिवरात्रि का व्रत रखकर गंगा में प्रार्थना करने उतरे थे।' उन्होंने बताया कि, 'मेरा पैर फिसल गया और मैं तेज बहाव में बहने लगा।'

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उन्होंने आगे बताया कि, 'उस वक्त गंगा की लहरें तेज थीं और राहत टीम की नाव भी तेज धारा में बह गई थी। इसके बावजूद, बटालियन के जवानों ने पानी में छलांग लगाकर हुड्डा को खींचकर बाहर निकाला। उत्तराखंड पुलिस ने इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

एक सेकंड की देर होती तो...
हुड्डा ने घटना के बाद कहा कि, 'अगर ये अधिकारी समय पर न होते, तो शायद मैं जिंदा न होता। मैं इनका जीवन भर आभारी रहूंगा।' अस्पताल में सामान्य जांच के बाद वे अब घर पर सुरक्षित और स्वस्थ हैं।

प्रो कबड्डी के धुरंधर
दीपक हुड्डा को प्रो कबड्डी लीग (PKL) के सबसे दमदार ऑलराउंडरों में गिना जाता है। उन्होंने अपने PKL करियर की शुरुआत तेलुगु टाइटन्स से की थी। इसके बाद वे पुणेरी पलटन, जयपुर पिंक पैंथर्स और बंगाल वॉरियर्स जैसी बड़ी टीमों का हिस्सा रहे।

दीपक हुड्डा की उपलब्धियां

  • 2016 के साउथ एशियन गेम्स में भारत के गोल्ड मेडल विजेता
  • 2018 के एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली टीम में वे शामिल थे।
  • 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

हालांकि, PKL सीजन 11 (2024) में वे अनसोल्ड रहे और किसी टीम का हिस्सा नहीं बने।

कहां से आते हैं दीपक हुड्डा?
दीपक हुड्डा का जन्म 10 जून 1994 को हरियाणा के रोहतक जिले के चांदणी गांव में हुआ था। उनके पिता रणबीर हुड्डा एक साधारण किसान और स्कूल टीचर थे, जिनका निधन उस वक्त हुआ जब दीपक महज 4 साल के थे। परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए दीपक ने बहुत कम उम्र में ही कबड्डी को गंभीरता से लेना शुरू किया।

दीपर ने पढ़ाई के साथ-साथ वह खेतों में काम करते और कबड्डी की प्रैक्टिस करते थे। उनकी मेहनत और जुनून ने उन्हें न सिर्फ राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया, बल्कि उन्हें लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बना दिया।

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