T20 World Cup: क्यों हो रहा है वर्ल्ड कप में ड्रॉप इन पिचों का इस्तेमाल, जानें कुछ बड़े कारण
टी20 वर्ल्ड कप के दौरान अमेरिका में हो रहे मैचों के लिए ड्रॉप इन पिचों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान पिच से बल्लेबाजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस वजह से आईसीसी की आलोचना भी हुई थी।
ड्रॉप इन पिचों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। ऐसी क्या मज़बूरी रही होगी कि वहां इस तरह की पिचों का इस्तेमाल हो रहा है। भारत और आयरलैंड के मैच में भी इसी तरह की पिच देखने को मिलने वाली है। इन पिचों का इस्तेमाल करने के कुछ कारण हैं।

निर्माण में लगता है कम समय
पारंपरिक पिचों को तैयार होने में कई सप्ताह या महीने भी लग सकते हैं। इसके विपरीत, ड्रॉप-इन पिचों को कुछ ही दिनों में स्थापित करके उपयोग के लिए तैयार किया जा सकता है। यह बहुउद्देश्यीय स्थलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहाँ विभिन्न प्रकार के खेल और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह स्थल के शेड्यूल में न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करता है।
आयोजन में सरलता आती है
ड्रॉप-इन पिचें लॉजिस्टिक दृष्टिकोण से भी फ़ायदेमंद हैं। इन्हें अपेक्षाकृत आसानी से ले जाया और स्थापित किया जा सकता है। पिचों को इधर-उधर ले जाने की इस क्षमता का मतलब है कि आयोजक विभिन्न स्थानों पर खेल की स्थितियों में एकरूपता सुनिश्चित कर सकते हैं।
मौसम के लिहाज से ख़ास
न्यूयॉर्क में, ड्रॉप-इन पिचों का उपयोग टी20 विश्व कप के लिए गेम-चेंजर रहा है। शहर की विविध मौसम स्थितियों और बहु-उपयोग स्टेडियमों को इस तकनीक से बहुत लाभ हुआ है। हालांकि अब तक के अनुभव से कह सकते हैं कि स्ट्रोक प्ले में मुश्किल होती है।
टूर्नामेंट के बाद हटा सकते हैं
कई स्टेडियम क्रिकेट के लिए इस्तेमाल न होकर कई तरह की गतिविधियाँ संचालित करते हैं। वहां ड्रॉप इन पिचों का अहम योगदान रहता है। इन पिचों को आयोजन होने के बाद हटा दिया जाता है ताकि अन्य खेलों और एक्टिविटीज के लिए स्टेडियम में किसी तरह की कोई बाधा ना हो।












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