Surya Kumar Yadav: सूर्या ने बताया क्या है उनके अजीबो-गरीब शॉट्स के पीछे का राज, कहां से सीखा
Surya Kumar Yadav: टीम इंडिया के आतिशी बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव इस समय जबरदस्त फॉर्म में हैं। विश्वकप में जिस तरह से उनका बल्ला बोल रहा है उसे देखकर हर कोई दंग है। इस विश्वकप में सूर्यकुमार यादव सबसे बेहतरीन बल्लेबाज के तौर पर सामने आए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने अपनी बेहतरीन पारियों में से एक पारी खेली। इस इनिंग में उन्होंने 25 गेंदों पर 61 रन बनाएं। उन्होंने मैदान के हर तरफ शॉट खेले और विकेट के पीछे जिस तरह से शॉट उन्होंने खेले उसे देखकर हर कई वाह-वाह कह उठा। यहां तक कि विपक्षी टीम को भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह कैसे इस तरह के शॉट खेल सकते हैं।

कहां से सीखा ये शॉट
सूर्यकुमार यादव ने अपने अजीबो-गरीब शॉट की सफलता को लेकर कहा कि मैंने रबर बॉल क्रिकेट बहुत खेली है। जब मैं स्कूल में था तो हम हार्ड सीमेंट ट्रैक पर रबर बॉल से खेलते थे, उस समय लोग जितनी तेज गेंद फेंक सकते थे, फेंकते थे। एक तरफ की बाउंड्री 70-80 मीटर की होती थी, जबकि पीछे बाउंड्री 70 मीटर से कम की होती थी। जब आप रबर बॉल से सीमेंट पिच पर खेलते हैं तो स्कूप शॉट मारना आसान होता है। आज आप जो भी शॉट स्क्वॉयर ऑफ द विकेट और बिहाइंड विकेट देखते हैं वह वहीं से आए हैं।

कभी भी अभ्यास नहीं किया
सूर्यकुमार यादव ने इन शॉट्स को लेकर कहा कि मैंने इन शॉट का कभी भी नेट्स पर अभ्यास नहीं किया। कभी भी बॉलिंग मशीन पर मैंने इन शॉट का अभ्यास नहीं किया। मैं अपने स्कूल के दोस्तों के साथ खेला करता था, ये सभी शॉट वहं से आ रहे हैं। सूर्यकुमार ने बताया कि जब रबर की गेंद आपके शरीर पर आ रही हो तो आपके पास इस तरह से शॉट खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। आप चोट लगने की बजाए इस तरह के शॉट खेलने की कोशिश करते हैं।

हमेशा दिमाग में रखता हूं 2-3 शॉट
अपने बल्लेबाजी की तकनीक को लेकर सूर्यकुमार यादव ने कहा कि मैं गेंद के आने से पहले 2-3 शॉट अपने दिमाग में रखता हूं, मैं सोच लेता हूं कि अगर गेंदबाज यहां डालेगा तो मैं ये शॉट खेलूंगा, वहां डालेगा तो वो शॉट खेलूंगा। मैं उन शॉट के बारे में हमेशा सोचता रहता हूं। मैं रनिंग पर रहता हूं तो भी यही सोचता रहता हूं। अगर गेंदबाज उन जगहों पर नहीं डालता है तो थोड़ा सा फंस जाता हूं मैं। इस समय आपको एडजस्ट करना होता है।

26 में से 8 पारियों में पहली गेंद पर बाउंड्री
भारत की ओर से खेलते हुए 26 टी-20 मैचों में से 8 बार सूर्यकुमार यादव ने पहली ही गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाया है। इसको लेकर सूर्यकुमार यादव ने कहा कि यह कोई योजना के तहत नहीं होता है, मैं जब भी मैदान में आता हूं तो मैं वार्मअप रहता हूं और उत्सुक रहता हूं। अगर मुझे अपने विपक्षी टीम को बताना होता है कि मैं यहां क्या करने आया हूं, यहां टीम के लिए तेज रन बनाने आया हूं। मैं पहली ही गेंद पर बाउंड्री, छक्का लगाने की कोशिस करता हूं।

मैच को कंट्रोल करना जरूरी
मैं शुरू की जो 7-8 गेंद खेलता हूं उसपर लगातार बाउंड्री लगाने की कोशिश करता हूं। यह मेरे खेलने का अंदाज है। अगर मुझे बाउंड्री नहीं मिलती है तो मैं बाद में उसे तलाशने की कोशिश करता हूं, इसमे कोई दिक्कत नहीं है। विकेट गिरने के तुरंत बाद मैं हमेशा बाउंड्री और छक्का लगाने की कोशिश करता हूं, जिससे कि मैच को हम कंट्रोल कर सके और अपनी तरह से उसे चला सके।












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