ये एक बदलाव कर दो, फिर देखों भारत में हर जगह चैम्पियन दिखाई देंगे- कपिल देव

kapil dev

नई दिल्ली, 18 अप्रैल: अगर हम पहले की तुलना में भारत के अंदर खेल की तरक्की को देखें तो तस्वीर काफी बदली हुई और काफी बेहतर नजर आती है। एक समय खेल में हमारे पास 1983 के वर्ल्ड कप के अलावा और कोई खास बड़ी चीज नहीं होती थी। ओलंपिक का गोल्ड मेडल तो बहुत ही दूर की बात थी। बहुत पहले हम हॉकी में ओलंपिक गोल्ड जीता करते थे लेकिन वह बेहद पुरानी बातें हो गईं। दशकों तक मामला ऐसे ही रहा लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत में खेलों में अभूतपूर्व तरक्की देखी गई है।

अभी भी खेल का वह माहौल होना बाकी है

अभी भी खेल का वह माहौल होना बाकी है

खेल को लेकर काफी क्रेज पैदा हुआ है और यहां पर पहले की तुलना में कहीं अधिक ग्लैमर और पैसा आने की वजह से युवाओं ने एक पेशे के तौर पर खेल में गंभीरता दिखानी शुरू की है। इसके बावजूद अभी भी कुछ खामियां बाकी है। विश्व के अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत में अभी भी खेल का वह माहौल होना बाकी है जो एक ऐसे खेल समाज का निर्माण करता है जहां पर आपको एक नहीं बल्कि सैकड़ों चैंपियन देखने को मिलते हैं। भारत में बहुत मुश्किल से एक नीरज चोपड़ा पैदा हुए हैं जिनको देखकर अगली पीढ़ी तरक्की कर सकती है लेकिन यहां अनेक नीरज चोपड़ा की जरूरत है।

बच्चों से ज्यादा जगह मां-बाप महत्वपूर्ण

बच्चों से ज्यादा जगह मां-बाप महत्वपूर्ण

कपिल देव मानते हैं अगर भारत में खेल कल्चर पैदा करना है तो यह सरकार द्वारा किए जा रहे काम या व्यक्तिगत स्तर पर बच्चों द्वारा की जा रही मेहनत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माता-पिता का नजरिया है। अगर माता-पिता खेल को गंभीरता से लेने का नजरिया रखते हैं तो उनका बच्चा स्वाभाविक तौर पर खेल को दिल से खेलेगा और पेशेवर होने के लिए पूरी कोशिश करेगा। कपिल मानते हैं कि बच्चों की जगह मां-बाप का नजरिया भारत में खेल समाज विकसित करने के लिए कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

माता-पिता की मेंटालिटी में बदलाव की दरकार है

माता-पिता की मेंटालिटी में बदलाव की दरकार है

कपिल ने कहा कि निश्चित तौर पर खेलों के मामले में भारतीय माता-पिता की मेंटालिटी पिछले कुछ सालों में बदली है लेकिन अभी और भी बदलाव की दरकार है। कपिल देव ने न्यूयॉर्क में मंगलवार को एक इवेंट में भारत की थॉमस कप में ऐतिहासिक जीत को भी याद कर रहे थे और इस दौरान उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके उन्होंने जवाब दिए। ऐसा ही एक सवाल पीटीआई की ओर से पूछा गया था कि कपिल देव पिछले कुछ सालों में भारतीय खेलों में ऐसा क्या बदलाव देखते हैं जो भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी तरक्की हासिल की है?

डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर बहुत बन रहे हैं- कपिल देव

डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर बहुत बन रहे हैं- कपिल देव

कपिल इस दौरान कहते हैं की बच्चे नहीं माता-पिता ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि हम अपने बच्चों को डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर ज्यादा बनाना चाहते हैं तो हमारा देश इनको बड़ी तादाद में बना रहा है। जिस दिन अपने बच्चों को हमने एक स्पोर्ट्स पर्सन बनाना स्वीकार कर लिया तो उस दिन हम कई चैंपियंस पैदा करेंगे। यह इवेंट भारतीय कम्युनिटी और क्रिकेट के फैंस से भरा हुआ था। दुनिया के सबसे महानतम ऑलराउंडर में से एक माने जाने वाले कपिल देव अपना खुद का एक उदाहरण देते हुए कहते हैं, "अगर मेरी बेटी दसवीं क्लास में होती और उसको जूनियर लेवल पर भारत में खेलना होता तो, मैं कहता कि पहले अपने एग्जाम दे दो।

विदेशों में मां-बात का नजरिया अलग होता है

विदेशों में मां-बात का नजरिया अलग होता है

"लेकिन अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में खेलों के लिए अपने बच्चों से परीक्षा छुड़वाई जा सकती हैं और कहा जा सकता है कि आप अगले साल एक्जाम दे लेना। अभी यह सोचने की प्रक्रिया हमारे देश में बदली नहीं है लेकिन बदलाव धीरे-धीरे हो रहे हैं इसी वजह से मैंने कहा कि हमारे समाज में, जिस तरह से हम रहते हैं, बच्चों से ज्यादा फिलहाल उनके माता-पिता महत्वपूर्ण है।"

खेल किट को स्कूल बैग में छुपा कर रखना पड़ता था

खेल किट को स्कूल बैग में छुपा कर रखना पड़ता था

कपिल याद करते हैं कि वह अपने बचपन के दिनों में किस तरीके से अपने खेल के साजो समान को स्कूल बैग में छुपा कर रखते थे लेकिन अब इस तरह का माहौल नहीं रहा है क्योंकि माता-पिता ने खेलों में भी अपने बच्चों को भेजना शुरू कर दिया है और उनको प्रोत्साहित भी करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कपिल भारत को युवाओं का देश कहते हैं जिसने ऐसी उपलब्धियां हासिल की है जो अभी भी दुनिया के कई देश हासिल नहीं कर पाए हैं।

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