वनडे में भारत की 1 रन से जीत, रोहित- कोहली भी थे टीम में, लेकिन क्या हुआ था युवराज सिंह के साथ ?
युवराज सिंह भारतीय टीम के लिए हमेशा एक मैच विनर रहे हैं और उन्होंने कैंसर होने के बाद भी टीम इंडिया के लिए धाकड़ प्रदर्शन किया।

12 साल पहले यही जनवरी का महीना था। भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थी। टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी थे। इस टीम में शामिल दो खिलाड़ी आज भी भारत के लिए क्रिकेट खेल रहे हैं। विराट कोहली और रोहित शर्मा। इस मैच को कई कारणों से याद किया जाता है। इस एकदिवसीय मैच को भारत ने एक रन से जीता था। हार के जबड़े से जीत छीनी थी। इसी मैच में युवराज सिंह को पहली बार कैंसर होन का संकेत मिला था। युवराज की खांसी में खून के अंश आ रहे थे। मैदान पर उनका दम घुट रहा था। इसके बावजूद वे मैदान पर डटे रहे। उन्होंने अपनी परेशानी जाहिर नहीं होने दी। बैटिंग और और लाजवाब फील्डिंग से उन्होंने भारत की जीत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
मैच से एक दिन पहले
15 जनवरी 2011 को भारत का दक्षिण अफ्रीका से वनडे मैच था। भारतीय टीम जोहांसबर्ग के एक होटल में रुकी थी। मैच से एक दिन पहले वाली रात युवराज को खांसी आयी। जब उन्होंने बेसिन में थूक फेंका तो देखा कि उसका रंग लाल और बैगनी है। यानी खांसने पर खून के अंश आने लगे थे। युवराज सिंह ने अपनी किताब- 'द टेस्ट ऑफ माइ लाइफ : फ्रॉम क्रिकेट टू कैंसर एंड बैक’ में लिखा है, 14 जनवर की रात ही मेरे शरीर ने संकेत दे दिया था कि सेहत ठीक नहीं है। खांसी का रंग देख कर युवराज ने भौं सिकोड़ी फिर कंधे उचका कर बेड पर आ गये। सोचा कोई साधारण बात है।
मैच के दिन
अगली सुबह युवराज मैदान पर उतरे। भारत ने पहले बल्लेबाजी की। मुरली विजय और सचिन तेंदुलकर ने पारी शुरू की। विजय के रूप में भारत का पहला विकेट 21 पर गिरा। 63 रन पर विराट कोहली के रूप में दूसरा विकेट गिरा। कोहली ने 22 रन बनाये। रोहित शर्मा 9 पर आउट हुए। भारत की पारी बहुत धीमी चल रही थी। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन, लोनवाबो सोत्सोबे, मोर्ने मोर्कल बहुत कसी हुई गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी की स्पिनर जोहान बोथा ने। उनकी गेंद इतनी टर्न हो रही थी कि भारतीय बल्लेबाज दबाव में आ गये थे। 67 रन के स्कोर पर सचिन भी आउट हो गये। उन्हें जोहान बोथा ने 24 रनों पर बोल्ड कर दिया था। इसके बाद युवराज सिंह और धोनी ने पारी को आगे बढ़ाया। युवराज जब मैदान पर उतरे तो यही मना रहे थे कि उनका बोथा से सामना न हो। धोनी और युवराज ने संभल कर खेलना शुरू किया।
जब बीच मैदान पर युवराज की सांस फूलने लगी
धोनी और युवराज विकेट के बीच तेज दौड़ के लिए जाने जाते थे। सिंगल के सहारे स्कोर बढ़ने लगा। युवराज इसके पहले डरबन के वनडे में सिर्फ 2 रन बना सके थे। इस मैच में उन्होंने रन बनाने की ठानी थी। लेकिन उन्हें मालूम न था कि कैंसर उनके शरीर में असर डालने लगा है। दक्षिण के कप्तान ग्रीम स्मिथ ने एक छोर से जोहान बोथा को लगाये रखा। दूसरे छोर से तेज गेंदबाज लगे हुए थे। युवराज बोथा की गेंद पर एक शॉट लगा कर रन के लिए दौड़े तो उन्होंने पाया कि सांस लेने में तकलीफ हो रही है। दो गेंद बाद युवराज फिर दो रनों के लिए दौड़े तो उन्होंने महसूस किया कि उनका दम घुट रहा है। सांस उखड़ रही थी। कोशिश के बाद भी लंबी सांस नहीं ले पा रहे थे। लेकिन उन्होंने मैदान पर अपनी तकलीफ बिल्कुल नहीं जाहिर होने दी। यहां तक कि धोनी भी अंदाजा नहीं लगा सके कि युवराज को कोई दिक्कत है क्यों कि वे पहले तरह ही बहुत तेज दौड़ रहे थे।
तकलीफ के बाद भी बनाये 53 रन
पारी के बीच में युवराज को लगा कि उनके शरीर के बाएं हिस्से में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। वे बाएं हाथ के बल्लेबाज थे लिहाज बैटिंग करने में परेशानी होने लगी। धोनी के साथ विकेट के बीच दौड़ने की एक अलग होड़ थी। संयोग से कुछ ओवर के बाद ड्रिंक्स इंटरवल हो गया। इससे युवराज को कुछ राहत मिल गयी। उन्होंने अपनी सारी शक्ति को समायोजित किया। मैच फिर शुरू हुआ। युवराज सिंह ने अर्धशतक लगाया। 53 रनों पर उन्हें सोत्सोबे ने आउट किया। धोनी भी सोत्सोबे का शिकार बने। उन्होंने 28 रन बनाये। भारत की टीम 47.2 ओवर में 190 रनों पर ऑलआउट हो गयी।
जीत-हार की कश्मकश
दक्षिण अफ्रीका के सामने 191 का लक्ष्य था। उस दिन भारत के तेज गेंदबाज मुनफ पटेल शानदार लय में थे। अभी स्कोर 7 रन था कि उन्होंने हासिम अमला को आउट कर दिया। लेकिन कप्तान स्मिथ जम गये। बाद में उन्हें भी मुनफ पटेल ने ही अपना शिकार बनाया। स्मिथ ने 77 रन बनाये। 177 पर दक्षिण अफ्रीका के 8 विकेट गिर चुके थे। ओवर की कोई समस्या नहीं थी क्यों कि अभी 39 ओवर ही पूरे हुए थे। हां, दक्षिण अफ्रीका के हाथ में अब दो विकेट ही बचे थे। उसे जीत के लिए 14 रन चाहिए थे। जब कि भारत को जीत के लिए 2 विकेट।
युवराज का वो कैच, भारत 1 रन से जीता
मुनफ पटेल 43 वां ओवर फेंकने आये। वेन पर्नेल और मोर्ने मोर्केल क्रीज पर थे। दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए चार रन चाहिए थे। मुनफ ने दूसरी गेंद पर मोर्केल को युसूफ पठान के हाथों कैच आउट करा दिया। मुनफ की अंतिम गेंद बाकी थी। दक्षिण को जीत के लिए दो रन चाहिए था। एक रन बनता तो मैच टाई हो जाता। मुनफ के ओवर की आखिरी गेंद पर्नेल ने प्वाइंट की तरफ खेली। युवराज सिंह अपनी पसंदीदी जगह प्वाइंट पर खड़े थे। उन्होंने एक शानदार कैच लेकर भारत को अविश्वसनीय जीत दिला दी। भारत 1 रन से यह मैच जीत चुका था। गेंद अभी भी युवराज के हाथों में कैद थी। वे भी खुशी मनाने के लिए दौड़ने लगे। सारे खिलाड़ी मुनफ की तरफ भागे फिर युवराज सिंह की तरफ दौड़े। उन्होंने युवी को पकड़ लिया और जीत की खुशी में मैदान पर गिरा दिया। एक के बाद एक कई किलाड़ी युवराज पर लद गये। वे जोश में चिल्ला रहे थे। 1 रन से जीतने की खुशी में वे पागल हो गये थे। तभी युवी ने महसूस किया कि उनका दम घुट रहा है। सेलिब्रेशन के बाद युवराज ड्रेसिंग रूम में लौटे तो उन्होंने महसूस किया कि उनका शरीर हिल रहा है। तब उन्होंने टीम के फिजियो पॉल क्लोज से बात की। 2011 में युवराज के साथ कमोबेश ये परेशानी बनी रही लेकिन वे विश्वकप जीतने तक खेलते रहे।












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