पांच वजहें क्यों कोच के चयन में विराट की राय अब सबसे महत्वपूर्ण है

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मुंबई। टीम इंडिया के नए हेड कोच के लिए सभी छह आवदेनकर्ताओं के इंटरव्‍यू हो चुके हैं। बीसीसीआई की क्रिकेट एडवाइजरी काउंसिल के सदस्‍य सौरव गांगुली ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर खुद यह जानकारी दी। कोच के सलेक्‍शन के सवाल पर गांगुली ने कहा कि हमने इंटरव्‍यू तो कर लिया है, लेकिन कोच का चयन बिना विराट की मर्जी के नहीं होगा।

टीम इंडिया के कोच का अभी ऐलान नहीं- गांगुली

उन्‍होंने साफ शब्‍दों में कहा कि विराट के देश लौटने पर ही नए हेड कोच के नाम का ऐलान होगा। गांगुली के इस बयान से एक बात तो अब बिल्‍कुल साफ है कि विराट की मर्जी के बिना टीम इंडिया में पत्‍ता भी नहीं हिलेगा। दरअसल, इसके पीछे कुछ ठोस वजह भी हैं। आइए जानते हैं क्‍या हैं वो कारण...

ये दौर कुछ ऐसा ही, जब धोनी ने संभाली थी टीम की कमान

ये दौर कुछ ऐसा ही, जब धोनी ने संभाली थी टीम की कमान

1. अब विश्व कप पर है, इसलिए चयन समिति पूरी तरह आगे की सोच रही है और इसके लिए टीम कप्तान की पसंद सबसे महत्वपूर्ण है। बीते दिनों राहुल द्रविड़ और सुनील गावस्‍कर जैसे बड़े खिलाड़ी चयन समिति को वर्ल्‍ड कप के हिसाब से टीम तैयार करने की सलाह दे चुके हैं।

द्रविड़ तो धोनी और युवराज जैसे बड़े प्‍लेयर्स के बारे में फैसला लेने तक की बात कह डाली है। यह दौर कुछ वैसा ही है, जब द्रविड़ के हाथों से महेंद्र सिंह धोनी को कमान मिली थी और कुछ समय बाद ही एक सीरीज खराब खेलने पर द्रविड़ की टीम से छुट्टी कर दी गई थी। ऐसा इसलिए किया गया था, क्‍योंकि धोनी अगले वर्ल्‍ड की तैयारी कर रहे थे और चुस्‍त फील्‍डर्स उनकी पहली पसंद थे।

कुंबले-विराट विवाद से सीख

कुंबले-विराट विवाद से सीख

2. अनिल कुंबले के साथ विराट कोहली के मतभेद खुलकर सामने आने के बाद बीसीसीआई फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। वह जानता है कि क्रिकेट फुटबॉल नहीं है, यहां कप्‍तान ही सर्वोपरि होता है। जाते-जाते खुद कुंबले ने भी यही बात कही थी, गांगुली का यह कहना, ''विराट को भी समझना होगा कि कोच कैसे काम करता है'', यह बताता है कि संदेश कप्‍तान को देना है।

कप्‍तान-कोच में ट्यूनिंग होना बेहद जरूरी

कप्‍तान-कोच में ट्यूनिंग होना बेहद जरूरी

3. अच्छे रिजल्ट के लिए कोच-कप्तान के साथ ट्यूनिंग जरूरी- खेल के मैदान में कप्तान और टीम के खिलाड़ियों को ही खेलना है, इसलिए चयन समिति भी जानती है कि विराट और टीम की पसंद को नजरअंदाज करने से परफॉरमेंस पर असर पड़ सकता है। भारतीय टीम पहले ऐसा दौर देख चुकी है।

एक समय जॉन राइट का दौर था, जब पूरी टीम एकसाथ थी। इसके बाद भारतीय क्रिकेट में ग्रेग चैपल का दौर भी देखा। वैसे गांगुली का एडवाइजरी काउंसिल में होना, इस बात की पुष्टि करता है कि वह कप्‍तान की जरूरतों की अनदेखी नहीं करेंगे। उनसे ज्‍यादा कोच का विवाद आखिर किसने झेला है।

विराट का विकल्‍प नहीं

विराट का विकल्‍प नहीं

4. विराट कोहली का भले ही कुंबले से विवाद रहा है, लेकिन यह भी सच है कि टीम इंडिया के पास उनके बड़ा खिलाड़ी नहीं है। ऐसे में चयन समिति को विराट के साथ ही जाना है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि जिस खिलाड़ी को वर्ल्‍ड कप में कप्‍तान रहना है, टीम उसी के हिसाब से दी जाए।

BCCI की प्रतिष्ठा दांव पर

BCCI की प्रतिष्ठा दांव पर

5. कुंबले और विराट का जिस तरह विवाद हुआ, उससे टीम इंडिया और बीसीसीआई की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अब चयन समिति कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। वह विराट को बताना चाहती है कि इस बार कोच उनकी ही पसंद का होगा, इसलिए कोच के चयन को टाला गया है। विराट से बात करने के बाद ही नाम पर फैसला होगा, जो कि कप्‍तान कोहली के लिए भी संदेश होगा कि इस बार लड़ाई-झगड़े की कोई जगह नहीं है, क्‍योंकि कोच के चयन में उनकी भी भूमिका रही है।

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English summary
five reasons, why virat kohlis views is so important in final take for coach
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