Explainer: गेमिंग एप्स पर बैन से IPL पर क्या असर होगा? क्रिकेटरों को भी सज़ा का प्रावधान
भारत सरकार ने बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन एवं रेगुलेटरी बिल पास कर दिया। पैसे लगाकर ऑनलाइन गेम खेलने पर रोक लगाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है। क्रिकेट भी ऑनलाइन गेमिंग में पीछे नहीं है। आईपीएल में ऑनलाइन गेमिंग का जमकर प्रचार होता है।
आईपीएल में ऑनलाइन गेमिंस एप्स प्रायोजक बनते हैं और प्लेयर्स को प्रचार करते हुए देखा जाता है। क्रिकेटरों को ऐसा कहते हुए देखा जाता है कि तुम अमुख एप पर जाकर टीम बना लो। अब वह सब बंद होने वाला है। इससे सरकार को भी राजस्व का नुकसान होगा।

राज्यसभा से पास होने के बाद कानून पूरी तरह से लागू होगा, इससे ऑनलाइन गेमिंग बनाने वाली कंपनियों के ऊपर एक्शन लिया जा सकेगा। आईपीएल में इस साल समाप्त हुए सीजन में कुछ गेमिंग एप कंपनियां बतौर प्रायोजक काम कर रही थीं, उनसे करोड़ों रुपये बीसीसीआई को मिल रहे थे। ये सब बंद होने से कंपनियों के साथ बोर्ड को भी नुकसान है। बीसीसीआई को विकल्प तलाशने पड़ेंगे, इस साल आईपीएल में दो प्रमुख गेमिंग कंपनियां आईपीएल में थीं, उनके साथ अलग-अलग समय के लिए करीबन 1000 करोड़ की डील है।
कितनी सज़ा का होगा प्रावधान
गेमिंस एप्स बनाने वाली कंपनियों के ऊपर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है, इसमें 3 साल की सज़ा, एक करोड़ का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा प्रचार करने वाले एक्टर्स, क्रिकेटर्स और अन्य सेलिब्रिटीज के ऊपर भी शिकंजा कसने का प्रावधान है। प्रचार करने वाले लोगों को 2 साल जेल या 50 लाख जुर्माना देना होगा, अथवा दोनों भी हो सकते हैं। इसके अलावा लेनदेन की सुविधा देने वाले बैंक पर भ एक्शन होगा।
कितने लोगों की जाएगी नौकरी
गेम्स खेलने वाले लोगों को पीड़ित माना गया है, उनके ऊपर एक्शन नहीं होगा। गेमिंस एप्स बंद होने से सरकार को राजस्व का नुकसान तो होगा लेकिन रोजगार के ऊपर असर पड़ेगा। माना जा रहा है कि 300 कंपनियां बंद हो जाएंगी और 200000 लोगों का रोजगार चला जा सकता है। अनुमान के अनुसार 50 प्रतिशत प्रेंचाइजी स्पोर्ट्स लीग बंद हो जाएंगी। टीमों और लीग्स की स्पॉन्सरशिप में करीबन 40 फीसदी कमी होगी। सरकार को भी करीबन 20 हजार टैक्स राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
वेंचर कैपिटल फर्म ल्यूमिकाई के अनुसार, भारतीय गेमिंग मार्केट का मूल्य 3.8 बिलियन डॉलर है और 2029 तक यह बढ़कर 9.2 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। इस सेक्टर में फिलहाल 1.3 लाख से ज्यादा कुशल लोग कार्यरत हैं।












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