कौन थे Champions Trophy की जीत के चैम्पियन, 10 साल पहले पूरी टीम ने दिया था कप्तान का साथ
On This Day Champions Trophy 2013: भारतीय क्रिकेट टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आज से 10 साल पहले इंग्लैंड को एजबेस्टन में हराकर आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीती थी और ये टीम इंडिया की अंतिम आईसीसी ट्रॉफी थी।
धोनी की अगुवाई में भारत ने बारिश के चलते 20 ओवर के हुए फाइनल में पहले बैटिंग करते हुए 7 विकेट के नुकसान पर 129 रन बनाए थे, जिसमें इंग्लैंड की टीम को 124 रनों पर समेट दिया था।

यह टूर्नामेंट शिखर धवन के नाम रहा, जिन्होंने 336 रन बनाए थे और 90.75 की औसत से बल्लेबाजी की थी। धवन आईसीसी टूर्नामेंट में भारत के लिए बहुत बड़ी ताकत रहे हैं। उन्होंने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 के फाइनल मुकाबले में जो 31 रन बनाए थे, वह उस टूर्नामेंट में उनका सबसे कम स्कोर था। इससे उनकी फॉर्म का पता चलता है।
धवन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में 94 गेंदों पर 114 रनों की पारी खेली। फिर वेस्टइंडीज के खिलाफ 107 गेंदों पर 102 रनों की पारी खेली। पाकिस्तान के खिलाफ 41 गेंदों पर 48 रनों की पारी खेली, श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में 68 रनों की पारी खेली।
टूर्नामेंट में रोहित शर्मा ने 177 रन बनाए थे। विराट कोहली ने 176 रन बनाए थे जिसमें फाइनल मैच में 43 रन बनाए गए थे। रवींद्र जडेजा ने 12 विकेट लिए थे, जबकि फाइनल मैच में 33 रनों की पारी भी खेली थी। इशांत शर्मा के हिस्से 10 विकेट आए, अश्विन ने 8 विकेट लिए थे, भुवनेश्वर कुमार ने 6 विकेट और उमेश यादव के खाते में 4 विकेट आए थे।
ये आंकड़े बताते हैं कि टीम इंडिया ने किस तरह से एकजुट होकर यह चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। शिखर धवन को गोल्डन बैट, बेस्ट प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट, सबसे ज्यादा रन, साउथ अफ्रीका के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड दिया गया था। रवींद्र जडेजा भी चमके थे, जिनको गोल्डन बॉल, फाइनल मैच में प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड, सबसे ज्यादा विकेट और वेस्टइंडीज के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड दिया गया था।
निश्चित तौर पर शिखर धवन के साथ जडेजा भी आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की जीत के हीरो थे। चैंपियंस ट्रॉफी से पहले भारत ने 2011 में वर्ल्ड कप जीता था। इन दो बड़े टूर्नामेंट के फाइनल में विराट कोहली ने दो ऐसी पारियां खेली हैं जिसमें अर्धशतक नहीं आया, लेकिन ये उनके करियर में जीवन भर याद रहेगी। विराट कोहली ने 2011 के विश्व कप फाइनल में, जब भारतीय टीम 31 रन पर दो विकेट गंवा चुकी थी, तब 49 गेंदों पर 35 रनों की पारी खेली थी।
चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल में जब भारत की आधी टीम 61 रनों पर पवेलियन लौट चुकी थी तो विराट का योगदान 34 गेंदों पर 43 रन था।












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