WTC FINAL 3rd Day: अजिंक्य का अर्थ ‘अजेय’ और शार्दुल का अर्थ ‘शेर’

WTC Final: भारत के लिए सबसे बड़ी साझेदारी सातवें विकेट के लिए हुई। पहले सत्र में भारत ने केवल भरत का विकेट खोया। लंच के तुरंत बाद अजिंक्य रहाणे 89 बनाकर आउट हो गये। इस तरह ये महत्वपूर्ण साझेदारी टूट गयी।

ajinkya rahane shardul thakur

WTC FINAL 2023, 3rd Day: ओवल में तीसरे दिन पहले सत्र में भारत ने 22 ओवर के खेल में 109 रन बनाये। टेस्ट मैच में प्रति ओवर करीब 5 रन की औसत से रन बनना बेहद मुश्किल काम है। भारत संकट में घिरा हुआ था। फिर भी उसने ये कमाल किया। उसने तेज बल्लेबाजी कर ऑस्ट्रेलिया पर काउंटर अटैक किया। अजिंक्य रहाणे और शार्दुल ठाकुर ने सातवें विकेट के लिए 109 रनों की साझेदारी की।

इस मैच में भारत के लिए ये सबसे बड़ी साझेदारी है जो सातवें विकेट के लिए हुई। पहले सत्र में भारत ने केवल भरत का विकेट खोया। लंच के तुरंत बाद अजिंक्य रहाणे 89 बनाकर आउट हो गये। इस तरह ये महत्वपूर्ण साझेदारी टूट गयी।

सातवें विकेट के लिए छठी शतकीय साझेदारी
ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन गेंदबाजी के बावजूद रहाणे और शार्दुल की जोड़ी ने सातवें विकेट के लिए 100 से अधिक रनों की साझेदारी की। सातवें विकेट या इससे नीचे के क्रम पर यह भारत की इंग्लैंड में छठी शतकीय साझेदारी है। इन 6 में से दो साझेदारियों में शार्दुल ठाकुर का नाम दर्ज है। शार्दुल ने रहाणे के साथ मिल विश्व टेस्ट चौपिंयनशिप के फाइनल में भारत की तरफ से सबसे बड़ी साझेदारी की।

शार्दुल ने 2021 के ओवल टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ दोनों पारियों में अर्धशतक बनाये थे। फाइनल में जब बाउंस और स्विंग के बीच सातवें विकेट के लिए इतनी अच्छी बल्लेबाजी हो सकती है तो फिर पहले, दूसरे या तीसरे विकेट के लिए क्यों नहीं ऐसी बैटिंग हुई? इससे समझा जा सकता है कि भारत के शीर्ष बल्लेबाजों ने कितनी गैरजिम्मेदाराना बैटिंग की। वह भी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में। इसके पहले रहाणे और जडेजा ने पांचवें विकेट के लिए 71 रनों की साझेदारी की थी।

तीसरे दिन भी पिच से बाउंस
तीसरे दिन का खेल शुरू हुआ तो पिच अभी भी तेज गेंदबाजों की मददगार थी। सूखी पिच पर गेंद को भरपूर बाउंस मिल रही थी। इससे भारत के बल्लेबाज परेशान रहे। साहसिक शार्दुल ठाकुर को पैट कमिंस की उठती हुई गेंद पर लगातार दो बार चोट लगी। ऑस्ट्रेलिया ने गेंदबाजों ने अपने कल की लाइन बरकरार रखी। वे गेंद की लेंथ भले बदल रहे थे लेकिन लाइन ऑफ स्टंप या उसे बाहर रखी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों में यही अंतर। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज एक ही लाइन पर लगातार बॉल डालते रहे। जब कि भारतीय तेज गेंदबाजों ने शॉर्ट गेंद डालने में देर कर दी और उनकी बॉलिंग में अनुशासन भी नहीं था। ऑस्ट्रेलिया ने जरूरत के मुताबिक शॉर्ट ऑफ लेंथ और बैंक ऑफ लेंथ, दोनों तरह की गेंदें फेंकी। हालांकि कप्तान पैट कमिंस के लिए नोबॉल एक बड़ी समस्या रही। शार्दुल ठाकुर का विकेट नो बॉल के कारण ही नहीं मिल सका। इसके पहले वे नोबॉल के कारण रहाणे का विकेट नहीं ले सके थे।

तीसरे दिन की दूसरी गेंद पर ही ऑस्ट्रेलिया को विकेट
तीसरे दिन की दूसरी गेंद पर ऑस्ट्रेलिया को विकेट मिल गया। स्कॉट बोलैंड की इस गेंद ने ऑफ स्टंप की लाइन में गुड लेंथ पर टप्पा खाया और कांटा बदल कर मिडिल स्टंप की तरफ आयी। श्रीकर भरत इसे डिफेंस करना चाहते थे लेकिन उनके बैट और पैड के बीच गैप था जिसकी वजह से गेंद ने गिल्लियां बिखेर दी। भरत ने अधूरे मन से ये शॉट खेला जिसकी उन्हें कीमत चुकानी पड़ी। भारत का छठा विकेट 152 पर गिरा।

इसके बाद शार्दुल ठाकुर, रहाणे का साथ देने आये। शार्दुल को कमिंस की राइजिंग डिलिवरी पर दो बार चोट लगी। उनके दो कैच भी छूटे। लेकिन इसके बावजूद वे बहादुरी से डटे रहे। शार्दुल ने मिचेल स्टार्क की गेंद पर एक्सट्रा कवर इलाके में एक जोरदार शॉट खेल कर चौका बटोरा।

रहाणे-शार्दुल ने चयन को सही साबित किया
रहाणे और शार्दुल ने अपने चयन को सही साबित किया। अंजिक्य रहाणे डेढ़ साल बाद टेस्ट मैच खेलने उतरे थे। भारत की नाव जब बीच मझधार में डूबने वाली थी तब उन्होंने पतवार थामने की हिम्मत दिखायी। उन्होंने जडेजा और शार्दुल ठाकुर के साथ मिल कर भारत के स्कोर को 200 के पार पहुंचाया।

इस खास टेस्ट मैच के लिए जब शार्दुल ठाकुर का चयन हुआ था तब कई लोगों ने सवाल उठाये थे। लेकिन उछाल वाली पिचों पर शार्दुल टेलइंडर्स में सबसे अच्छा खेलते हैं। एक बार फिर उन्होंने अपनी बैटिंग ये बात साबित की। मिचेल स्टार्क 145 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंद फेंकते हैं। अगर शार्दुल इन पर दौ चौके मारते हैं तो ये बहुत बड़ी बात है।

किस्मत बहादुरों के साथ
पहले सत्र में रहाणे और शार्दुल कई बार ऑफ स्टंप के बाहर बीट हुए। शार्दुल के 2 और रहाणे का एक कैच छूटा। लेकिन ये दोनों बहादुरी के साथ मैदान पर डटे रहे। आज किस्मत भी इनके साथ थी। इसीलिए कहा जाता है कि किस्मत बहादुरों का साथ देती है। ऑस्ट्रेलिया तेज गेंदबाजों ने दूसरे दिन जो खौफ पैदा किया था उसे तीसरे दिन लंच तक रहाणे और शार्दुल ने खत्म कर दिया।

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