बाबा रामदेव पर भाजपा सरकार मेहरबान, 12 करोड़ से ज्यादा की जमीन 'कौड़ी' के भाव में देगी
शिमला। योगगुरु बाबा रामदेव पर हिमाचल की मौजूदा सरकार खासा मेहरबान हो गई है। कांग्रेस राज में जिस जमीन की अलाटमेंट रद्द की गई थी, वही जमीन अब 2 करोड़ रुपये में 99 साल के पट्टे पर देने जा रही है। जबकि, इस समय इसी जमीन का बाजार भाव 12 करोड़ रुपये से अधिक है। भाजपा सरकार सोलन जिला के पास साधुपुल में यह जमीन बाबा रामदेव को सरकार देने जा रही है।

93 बीघा जमीन रामदेव को दी जा रही
करीब 93 बीघा जमीन जिस तरीके से बाबा रामदेव को राज्य सरकार औने-पौने दामों में देने जा रही है, उसको लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को इस मामले पर विधानसभा के अंदर व बाहर घेरा है। आरोप लगाया है कि इस सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। सरकार ने इस सौदे को लेकर केबिनेट से भी मंजूरी ले ली है। जिससे बाबा रामदेव को यह जमीन बाजार भाव से नहीं, बल्कि मात्र 2 करोड़ 39 लाख 4,720 रुपये में मिल जायेगी।
हरिद्धार के नजदीक है जमीन
प्रदेश के सोलन जिला में यह जमीन हर्बल गार्डन बनाने और पतंजलि योगपीठ की शाखा स्थापित करने के लिए आवंटित की गई थी। यह इलाका हरिद्धार के भी नजदीक पड़ता है। इस लिहाज से भी बाबा रामदेव इस पर नजर गढ़ाये बैठे थे। बता दें कि पूर्व भाजपा सरकार जब प्रेम कुमार धूमल सीएम थे,तो 2010 में बाबा रामदेव ट्रस्ट को यह जमीन 17 लाख 31214 रुपये में देने का फैसला लिया था। दो फरवरी 2010 को लीज पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन बाद में जब सरकार बदली तो वीरभद्र सिंह के शासनकाल में इस लीज को रद्द कर दिया गया। लेकिन अब दोबारा भाजपा सरकार प्रदेश में सत्ता में आई तो एकाएक बाबा रामदेव को फायदा पहुंचाने के लिये ताना-बाना बुन लिया गया।

99 सालों के लिए पट्टे पर दी गई
धर्मशाला में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं हरोली के विधायक मुकेश अग्रिहोत्री और नादौन के विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रश्न के जवाब में बताया कि जिला सोलन के साधुपुल में योगगुरु बाबा रामदेव की संस्था को सरकारी भूमि 93-00 बीघा, मौजा कलहोग, तहसील कंडाघाट 99 सालों के लिए पट्टे पर दी गई है। इसमें सरकार ने शर्तें निर्धारित की हैं। भूमि की चालू वित्त दरों के अनुसार वर्तमान में कुल कीमत 11 करोड़ 95 लाख 23 हजार छह सौ रुपये है।
संस्था ने दो फरवरी 2010 को शुरू में 17,21,214 रुपये की एकमुश्त राशि पट्टानामा के निष्पादन के समय जमा करवाई थी। सरकार के 20 नवंबर 2018 के निर्णय के अनुसार अब संस्था को दो करोड़ 21 लाख 73 हजार 506 रुपये की राशि नया पट्टानामा पंजीकृत करते समय या उससे पूर्व जमा करवाना अपेक्षित है।












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