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up news : शाहजहांपुर में मासूम की बलि चढाने वाली हत्यारी महिला को उम्र कैद की सजा, 5 साल पहले की थी हत्या

21वीं सदी में हमारा देश विकास के बड़े-बड़े करता है परन्तु अभी भी इस समाज में तंत्र-मंत्र, जादू-टोना जैसी तांत्रिक क्रियाएँ अपनी जगह बनाये हुए हैं। क्या इस वैज्ञानिक युग में सोच सकते हैं कि कोई इंसान किसी दूसरे इंसान की बलि दे सकता है? आज से 5 वर्ष पूर्व 2017 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले में ऐसा ही एक काण्ड हुआ था, जिसमे तांत्रिक के झांसे में आकर एक महिला और दो अन्य लोगों ने मिलकर एक बच्चे की बलि चढ़ा दी थी। आज कोर्ट ने इन आरोपियों को दोषी मानते हुए, हत्यारी महिला और उसके दो अन्य साथियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है।

हत्या के बाद बच्चे का खून भी पिया था

हत्या के बाद बच्चे का खून भी पिया था

दरअसल, शाहजहांपुर में 5 साल पहले हुई बच्चे की हत्या के मामले में न्यायालय ने एक महिला सहित तीन लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई है । महिला और दो अन्य लोगों पर एक मासूम बच्चे की बलि देने का आरोप था। मामला 5 दिसंबर 2017 को जमुका गांव का था। यहां की रहने वाली महिला धनी देवी ने पड़ोस के ही बच्चे को एक तांत्रिक के कहने पर अपने साथियों की मदद से खुद के घर पर ही गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि महिला के औलाद न होने के कारण तांत्रिक ने उसे बच्चे की बलि देने और उसका खून पीने की बात कही थी ।
जिसके बाद महिला ने तांत्रिक के कहने पर इस निर्मम घटना को अंजाम दिया था। पूरा मामला अपर सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में चल रहा था, जिसके बाद आज कोर्ट ने महिला और उसके साथियों को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है।

पहले भी हुए है ऐसे कई हत्याकांड

पहले भी हुए है ऐसे कई हत्याकांड

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़े बताते हैं कि जादू-टोने ने 10 साल में एक हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. 2012 से 2021 के बीच देशभर में 1,098 लोगों की मौत का कारण जादू-टोना ही था।
देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर मानव बलि की ख़बरें, जादू-टोना से जुड़ी ख़बरें पढऩे सुनने को मिलती रहती हैं। बीते दिनों गुज़रात के जूनागढ़ में एक पिता पर 14 साल की बेटी की हत्या का आरोप लगा और पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है। पिता पर धन और पुत्र प्राप्ति की लालसा में बेटी को बलि देने का सन्देह है। दो साल पहले कानपुर की छ: साल की एक बच्ची भी मानव बलि का शिकार बन गयी। कानपुर के एक दम्पति की ख़ुद की सन्तान नहीं थी। पति-पत्नी दोनों दु:खी रहते थे, उन्हें किसी तांत्रिक ने बच्चे होने का यह उपाय बताया कि वह किसी मानव की बलि देंगे, तो सन्तान प्राप्ति होगी। दम्पति ने इस अंधविश्वास के फेर में गाँव से एक छ: साल की बच्ची का अपहरण करवाया और फिर उसकी बलि दे दी। इसी तरह विदिशा (बिहार) में एक नव-विवाहित पति-पत्नी के आपसी झगड़े का फायदा उठाते हुए एक तांत्रिक ने झाड़-फूँक के नाम पर महिला से दुष्कर्म कर दिया। महिलाओं से तांत्रिकों द्वारा दुष्कर्म के ऐसे मामले हर महीने कहीं-न-कहीं सुनने, पढऩे को मिलते हैं।

क्या कहता है कानून

क्या कहता है कानून

फिलहाल अंधविश्वास, काला जादू, जादू-टोना या मानव बलि से निपटने के लिए कोई ऐसा कानून नहीं है जो देशभर में लागू होता हो। हालांकि, इंडियन पीनल कोड (IPC) की कुछ धाराएं हैं जिनमें ऐसे अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। अगर मानव बलि दी जाती है तो धारा 302 (हत्या की सजा) के तहत सजा दी जाती है। इसके अलावा, धारा 295A के तहत भी केस दर्ज किया जा सकता है। ये धारा तब लगाई जाती है जब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर कोई काम किया जाता है।
काला जादू या जादू-टोना या अंधविश्वास से निपटने के लिए भले ही कोई केंद्रीय कानून नहीं है लेकिन कई राज्य ऐसे हैं जहां इन्हें लेकर कानून हैं। राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग सजा के प्रावधान हैं। इन कानून में अंधविश्वास या काला जादू की परिभाषा भी नहीं है, ये कानून सिर्फ ऐसी प्रथाओं के अपराधीकरण की बात करते जो दशकों से चली आ रहीं हैं। माना जाता है कि अंधविश्वास और काला जादू जैसी प्रथा की जड़ें धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं इसलिए सरकारें उनके खिलाफ कानून लाने से बचती हैं।

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