MP के इस जिले में 11 साल से पेड़ के नीचे चल रहा है सरकारी स्कूल, बच्चों के लिए मिड-डे मील भी बनी तपस्या
Satna News: मध्य प्रदेश सरकार, डिजीटल और हाईटेक शिक्षा के पर जोर तो दे रही है, लेकिन सतना जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में नाकाम साबित हो रही है। शहरी क्षेत्रों में जहां बच्चे ऑनलाइन शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं तो वहीं जन शिक्षा केंद्र उचेहरा में बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
उचेहरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत इटहा खोखर्रा के मुंगहनी कला में संचालित शासकीय प्राथमिक पाठशाला से चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जो शिक्षा विभाग की लापरवाही और उदासीनता को बताने के लिए काफी है।

दरअसल, जिला मुख्यालय से महज 35 किमी दूर इस विद्यालय को 11 साल पहले खोल दिया गया था लेकिन कभी किसी के मकान में या फिर शिक्षक खुद मकान किराए पर लेकर स्कूल संचालित रहे हैं। लेकिन बच्चों के लिए जरूरी आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर दिया जा रहा है।
Recommended Video

दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी न तो यहां पर कोई पेयजल की व्यवस्था है और न ही मिड डे मील बनाने के लिए रसोई घर का निर्माण कराया गया है। बारिश के समय में बच्चों को एक प्राइवेट कमरे में शिक्षा ग्रहण करना पड़ रहा है, जबकि खुले मौसम में आम के पेड़ के नीचे बच्चों को शिक्षा ग्रहण करना पड़ता है।

प्राथमिक शाला मुगहनी कला की हेडमास्टर मीना पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 सालों से विद्यालय भवन की मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं किया जा सका, ज्यादातर यहां पर पढ़ने वाले बच्चे आदिवासी अंचल से हैं। जिन्हें विद्यालय भवन न होने के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

जब इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी विष्णु त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि शासन स्तर पर कई बार विद्यालय भवन की मांग की गई है। लेकिन भवन अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications