MP News: सतना के आशीष सिंह ने Mount Everest पर फहराया तिरंगा, 5 दिनों में नाप दी 9 हजार मीटर की ऊंचाई
Mount Everest Ashish Singh: आशीष हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कश्मीर में ऊंचे पहाड़ों पर कई चढ़ाई के साथ 3 साल से अधिक समय से चढ़ाई कर रहा है। उन्होंने एक सोलो मोटर साइकिल चलाई है और पूरे हिमाचल प्रदेश को कवर किया है।

Mount Everest Ashish Singh: मध्य प्रदेश के पर्वतारोही आशीष सिंह ने माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया है। आशीष सिंह ने 23 मई को सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। माउंट एवरेस्ट फतह करने का उनका अभियान 18 मई से शुरू हुआ था। उनका यह अभियान 5 दिनों तक चला। 8 सदस्यीय टीम में आशीष मध्य प्रदेश से एकमात्र पर्वतारोही थी।
सतना जिले के रामपुर बघेलान क्षेत्र के हिनौता निवासी 28 वर्षीय आशीष सिंह ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट 8848 मीटर फतेह कर ली है। यह कीर्तिमान बनाने वाले वह जिले के दूसरे पर्वत रोही हैं। इसके पहले रत्नेश पांडेय ने यह उपलब्धि हासिल की थी। आशीष अभी काठमांडू स्थित कैंप में है। आशीष ने बताया कि जालंधर से 2016 में इंजीनियरिंग करने के बाद सोलर व्हीकल पर रिसर्च के दौरान पर्वत रोही बनने का जुनून सवार हुआ था। काफी समय से तैयारी कर रहा था रोजाना सुबह 5 बजे उठ जाता था। 10 किलोमीटर दौड़ता था। और जिम जाता था। अभ्यास करता थ। एवरेस्ट के पहले लेह लद्दाख की वर्जिन पीठ और नेपाल की लयूचे ईस्ट पर चढ़कर अपनी तैयारी को पुख्ता किया।

आशीष को 2016 में इंजीनियरिंग करने के बाद पहाड़ों पर चढ़ने का शौक जगा। कुछ अलग करना चाहते थे। तभी कोरोना वायरस आ गया। सब लोग लोग प्रकृति के करीब जाने लगे मैंने भी सोचा पहाड़ों को एक्सप्लोर करने का सही समय है। रत्नेश पांडे ने गाइडलाइन ली। अटल बिहारी वाजपई इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में उन्नत पर्वतरोही कोर्स पूरा किया।
एवरेस्ट अभियान:- सात अप्रैल को काठमांडू से दल एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचा।
- चढ़ाई के दौरान बेस कैंप 2, 3 औ 4 में थोड़ा आराम किया।
- एवरेस्ट के पहले तैयारियों को परखने 6000 मीटर ऊंची लागू चेस्ट चोटी की चढ़ाई की।
- 18 मई को रात 11:00 बजे 8 पर्वतारोहियों के साथ एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की।
- 22 मई की रात 10:00 बजे आखरी चढ़ाई शुरू की।
- 23 को 24 घंटे बाद रात 10:00 एवरेस्ट की पीठ पर पहुंचा। 25 मई को दल पीट से नीचे उतर बेस कैंप में पहुंच गया।

पेसे से मैकेनिकल इंजीनियर आशीष सिंह के पिता लक्ष्मण सिंह किसान है। अपने परिवार की प्रेरणा से उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। आशीष सिंह बताते हैं कि प्रदेश के सातवें और सतना जिले के दूसरे माउंटेनियर हैं। जिन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया है। आशीष इसका श्रेय विक्रम अवॉर्डी रत्नेश पांडेय और संजय बनर्जी को देते हैं। गौरतलब है कि रत्नेश जिले के पहले माउंटेनियर थे जिन्होंने एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराया था।
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