save soil campaign: सद्गुरु का संदेश, मिट्टी को पुनर्जीवित करना होगा, अन्यथा मानवता संकट में पड जाएगी
सागर, 9 जून। सेव सॉइल अभियान के तहत सद्गुरु जग्गी वासुदेव गुरुवार दोपहर में सागर पहुंचे थे। भैंसा में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हम एक बड़े संकट से गुजरने वाले हैं, अब बहुत ज़रूरी हो गया है कि हम मिट्टी को बचाने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाएं ताकि इस दिशा में सही निर्णय लिए जा सकें। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और जहां आवश्यक है उसे पुनर्जीवित करने के उपाय शीघ्र अपनाने होंगे। हमारी वर्तमान की गतिविधियां भविष्य निर्माण का मार्ग तय करेंगी।

सद्गुरु ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आज हम जो कार्यक्रम कर रहे हैं, यह कोई विरोध या धरना नहीं है। हमारी भावी पीढियों के भले के लिए आज हमें मिट्टी को बचाना होगा। हमारी जीवन के प्रति जिम्मेदारी है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो रही है, वह अनउपजाऊ हो रही है। धीरे धीरे रेत में बदल रही है, इसे रोकना होगा। यह केवल मेरी या आपनी की जिम्मेदारी नहीं है, हम सबकी जिम्मेदारी है। हमें आवाज इतनी बुलंद करना होगी ताकि शासन और सरकार ऐसी नीतियां बनाएं ताकि इसका संरक्षण किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी समर्थन मिला है। सद्गुरु जग्गी वासुदेव दोपहर में झांसी मार्ग की तरफ से सागर में प्रवेश किए, भैंसा गांव में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें भारी संख्या में लोग थे।
सद्गुरु 100 दिन की यात्रा पर निकले हैं
सद्गुरु ने मार्च में मिट्टी बचाओ आंदोलन की 100 दिवसीय यात्रा प्रारंभ की थी। गुरुवार को 79 वे दिन आज सागर पहुंची। 27 देशों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा का उद्देश्य मिट्टी में नीतिगत सुधार के जरिये कृषि भूमि में कम से कम 3 से 6 प्रतिशत जैविक तत्व को आवश्यक रूप से बनाए रखना है। मृदा वैज्ञानिकों का कहना है कि इस जैविक तत्व के बिना मिट्टी की मृत्यु निश्चित है। इस घटना को 'मिट्टी का विलुप्त होना' भी कहा जा रहा है। सद्गुरु सागर के बाद भोपाल रवाना हुए।
आर्मी, जिला प्रशासन, डॉक्टरों ने किया अभिनंदन
सद्गुरु जग्गी वासुदेव के सागर पहुंचने पर जिला प्रशासन सहित तमाम अधिकारियों ने स्वागत किया। आर्मी ने भी उनके स्वागत के लिए विशेष बैंड की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स सहित सैकडों की संख्या में लोग शामिल हुए।

क्या है मिट्टी बचाओ अभियान, ऐसे समझे
मिट्टी में जब दशमलव पांच प्रतिशत से कम जैविक तत्व बचते हैं, तब वह रेत में तब्दील होने लगती है। ऐसे में भूमि में 3 से 6 प्रतिशत जैविक तत्व होना आवश्यक है। जबकि देश की भूमि में 0.68 प्रतिशत जैविक तत्व की मौजूदगी बताई गई है, जिस कारण मरुस्थलीकरण होने का खतरा बढता जा रहा है। इसलिए मिट्टी बचाओ अभियान के तहत लोगों को जागरुक कर जैविक खेती, विष रहित खेती, गौ आधारित खेती को बढाना और कैमिकल्स व कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करने के प्रति जागरुक करना है।












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