Damoh: माता रुक्मणी देवी कुंडलपुर मठ में 21 साल बाद लौटेंगी, राधाष्टमी को होंगी विराजमान
श्री राधाष्टमी के दिन माता रुक्मणी देवी की पुरात्तव व ऐतिहासिक महत्व की प्रतिमा अपने मूलमठ में विराजमान कराई जाएगी। बता दें कि करीब 22 साल पहले तस्करों ने मठ से यह प्रतिमा चुरा ली थी। इसे विदेश भेजने की तैयारी थी, लेकिन राजस्थान में तस्करों को गिरफ्तार कर प्रतिमा को बरामद कर लिया गया था...

दमोह जिले के सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर स्थित माता रुक्मणी देवी के मंदिर में एक बार फिर ऐतिहासिक प्रतिमा विराजमान होगी। यह प्रतिमा साल 2002 में तस्करों ने चुरा ली थी। बाद में यह प्रतिमा राजस्थान के हिंडोला से होते हुए वापस दमोह लाई गई थी। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के प्रयासों से आगामी राधाष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में माता रुक्मणी देवी की मूल प्रतिमा को फिर से विराजमान कराया जाएगा। बता दें कि यह प्रतिमा राजस्थान के हिंडोला से बरामद हुई थी। बाद में इसे विदिशा जिले के ग्यारसपुर संग्रहालय में रखा गया था। 2019 में यह प्रतिमा दमोह लाई गई थी। तब से फिलहाल तक प्रतिमा दमोह के दमयंती संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई है।
ऐतिहासिक प्रतिमा तो तस्करों ने मंदिर से चुरा लिया था
जानकारी अनुसार दमोह जिले से 37 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ कुंडलपुर पटेरा ब्लॉक में है। कुंडलपुर में स्थित मां रुक्मणी मठ से 4 फरवरी 2002 की रात अज्ञात चोरों द्वारा मां रुक्मणी की बेशकीमती प्रतिमा को चोरी कर लिया था। मामले की शिकायत पटेरा थाने में दर्ज कराई गई थी। बाद में यह प्रतिमा राजस्थान के हिंडोली जिला से अप्रैल 2002 में ही बरामद कर ली गई थी। मां रुक्मणी की प्रतिमा को विदिशा के ग्यारसपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था।
जानिए मां रुक्मणी की प्रतिमा के वापस लौटने की कहानी..
2002 में मां रुक्मणी की प्रतिमा चोरी होने और मिलने के बाद भी ग्यारसपुर संग्रहालय में रखे रहने का मुद्दा काफी उछलता रहा था। चुनावों में यह राजनीति का मुद्दा बन गया। वर्तमान में दमोह सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने पहले कार्यक्रम में माता रुक्मणी की प्रतिमा को वापस मठ में स्थापित कराने का संकल्प लिया था। यह मामला वे दमोह से संसद तक लेकर पहुंचे थे। दूसरे कार्यक्रम में पर्यटन एवं सस्कृति मंत्रालय का जिम्मा बतौर राज्यमंत्री उन्हें ही मिला था। उन्होंने ग्यारसपुर से प्रतिमा को दमोह बुलवा लिया था। अब माता रुक्मणी देवी की प्रतिमा को श्री राधाष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में कुंडलपुर स्थित मठ में स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी। बता दें कि बुंदेलखंड इलाके माता रुक्मणी का यह इकलौता मठ या मंदिर है।
सुखसागर में उल्लेख है कि माता रुक्मणी का हरण यहीं से हुआ था
बताते है कि सुखसागर ग्रंथ में वर्णित है की मां रुक्मणी का हरण कुंडलपुर से हुआ था। प्राचीन काल में इसे कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। अंबिका की पूजा के लिए पहुंची रुकमणी को भगवान श्री कृष्ण द्वारा हरण कर लिया गया था। इसी वजह से इस पवित्र स्थान से लोगों की आस्था जुडी हुई है। माता रानी के दरबार में मत्था टेकने के लिए देश-प्रदेश से लोग यहां आते हैं।












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