सरकार का गलत न‍िर्णय: 30 करोड में बना था कोव‍िड अस्‍पताल, अब मैदान

सागर। 5 जून

प्रदेश सरकार ने करीब एक साल पहले कोव‍िड काल के दौरान मप्र के सागर ज‍िले के बीना अंतर्गत आगासौद चक्‍क गांव में 30 करोड से अध‍िक राश‍ि खर्च कर पक्‍का टेंट लगाकर एक कोव‍िड अस्‍पताल बनाया था। इसका लाभ एक भी मरीज को नहीं म‍िल सका, केवल एक महिला इलाज के ल‍िए आई थी, उसे भी रेफर कर द‍िया गया था, अब इस अस्‍पताल को खत्‍म कर पूरा टेंट उखाड ल‍िया गया है। कुल म‍िलाकर करोडों रुपए पानी की तरह बहा द‍िए गए।

सागर के बीना में कोव‍िड अस्‍पताल को ड‍िस्‍मेंटल कर द‍िया गया है

मप्र सरकार की अदूरदर्शि‍ता और प्रशासन की गलत सलाह का सबसे ज्‍वलंत सागर ज‍िले के बीना आगासौद में कोव‍िड अस्‍पताल का सपना द‍िखाया था। ज‍िस तेजी से करीब 30 करोड रुपए पानी की तरह बहाकर यह अस्‍पताल बनाया गया था, उसी तेजी से इसे ड‍िस्‍मेंटल कर द‍िया गया। वर्तमान में मौके पर केवल टेंट के अवशेष बचे हैं। इस अस्‍थाई अस्‍पताल को पूरी तरह समाप्‍त कर द‍िया गया है।

कहां क‍ितना खर्च किया था
10 करोड़ से अस्पताल का डोम, 9 करोड़ से ऑक्सीजन बॉटलिंग और रिफिलिंग प्लांट में बीओआरएल ने, 4.21 करोड़ एप्रोच रोड में, 2 करोड़ उपकरण खरीदी और 1 करोड़ व्यय कर बिजली सबस्टेशन तैयार हुआ था।

30 नवंबर 2021 को अस्पताल बंद कर दिया गया
सरकार की अदूरदर्शिता के कारण 30 करोड़ रुपए से ज्यादा व्यय कर तैयार किया गया अस्थाई अस्पताल महज पांच माह चलने के बाद बंद हो गया है। सरकार के आदेश पर विभिन्न शासकीय विभागों के माध्यम से इस अस्पताल को तैयार करने में 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि व्यय की गई थी। इसमें 10 करोड़ रुपए के करीब डोम तैयार करने में, 9 करोड़ से ऑक्सीजन बॉटलिंग और रिफिलिंग प्लांट में बीओआरएल ने, 4.21 करोड़ एप्रोच रोड तैयार करने में, 2 करोड़ रुपए की उपकरण खरीदी, 1 करोड़ रुपए बिजली सबस्टेशन तैयार करने में व्यय किया गया। इसके अलावा भी कई विभागों ने यहां पर निर्माण कार्य एवं उन्हें सौंपी गई व्यवस्थाएं जुटाईं।

1000 बेड का बनना था अस्‍पताल, लेकिन 200 बेड का बन पाया
जब कोरोना की दूसरी लहर का पीक था और अस्पतालों में ऑक्सीजन से लेकर बेड तक की मारामारी थी। इस स्थिति को देख बीना रिफाइनरी की ऑक्सीजन पर आधारित 1000 बेड का सर्वसुविधायुक्त अस्थाई कोविड सेंटर 10 दिन में तैयार करने की घोषणा की थी। जोर-शोर से तैयारियां शुरू हुईं, लेकिन 10 दिन में यहां जमीन समतल भी न हो सकी। बाद में स्थितियों को देख घोषणा के एक माह 17 दिन बाद 12 जून को 200 बेड के अस्पताल का शुभारंभ किया गया।

4 डॉक्‍टरों सह‍ित 28 लोगों का था स्टाफ
स्‍वास्‍थ्‍य व‍िभाग से म‍िली जानकारी अनुसार अस्पताल में 28 लोगों की संविदा पर पदस्थापना की गई थी। इसमें 4 आयुष डॉक्टर, 12 स्टाफ नर्स और 12 सपोर्टिंग स्टाफ था, जिसमें वार्ड वॉय, कम्प्यूटर ऑपरेटर, आया व स्वीपर शामिल थे। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी से 31 दिसंबर तक का अनुबंध किया था।

बीओआरएल ने भी व्यय किए 9 करोड़
बीओआरएल ने अस्पताल के बेड तक आक्सीजन सप्लाई के लिए लाइनें बिछाई थीं साथ ही 25 टन प्रतिदिन ऑक्सीजन सप्लाई की क्षमता वाला ऑक्सीजन बॉटलिंग और रिफिलिंग प्लांट बनाया था। जानकारी के अनुसार कंपनी ने इसके लिए करीब 9 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई और ऑक्सीजन बॉटलिंग प्लांट पर 17 करोड़ रुपए खर्च होने थे। हर महीने इस बॉटलिंग प्लांट पर 2 करोड़ रुपए का खर्च आता।

आधा दर्जन अन्‍य सरकारी व‍िभागों ने भी करोड़ों खर्च क‍िए थे
अस्थाई कोविड अस्पताल का निर्माण करने में कई अन्य विभागों का भी करोड़ों रुपए व्यय हुआ है। इसमें पीडब्यूडी ने अस्पताल तक पहुंचने के लिए 3 किलो मीटर लंबी ए्प्रोच रोड का निर्माण। इसके अलावा बिजली कंपनी ने 800 मीटर 33 केवी व 2.25 किलोमीटर लंबी 11केवी बिजली लाइनें बिछाईं, इसके अलावा अस्पताल के समीप 315 एमवीए का छोटा सबस्टेशन भी तैयार किया गया था। पीएचई विभाग ने पानी की व्यवस्था कराई तो स्थानीय प्रशासन ने 10 एकड़ जमीन किराए पर ली।

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