झारखंड में मॉब लिंचिंग को लेकर हेमंत सरकार ने बनाया कानून, विधेयक विधानसभा में हुआ पास
रांची। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए मॉब लिंचिंग बिल को मंगलवार को विधानसभा में पेश किया, जिसे पारित कर दिया गया है। सरकार ने इस प्रस्तावित विधेयक का नाम The Jharkhand Prevention Of Mob Violence Bill 2021 रखा है। बता दें कि भाजपा ने इस बिल में संशोधन की मांग की थी । वहीं कांग्रेसी विधायकों ने बिल का स्वागत किया है।
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झारखंड में चंद्रयान के लिए जब एचईसी ने लॉन्चिंग पैड तैयार किया था तो पीएम मोदी ने राज्य को लॉन्चिंग स्टेशन तक कहकर संबोधित किया था। लेकिन उस वक्त नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने तबरेज अंसारी के मॉब लिंचिंग के बाद झारखंड को लिंचिंग पैड कह दिया था। बता दें कि झारखंड में कभी डायन बिसाही तो कभी अवैध संबंध के मामले को लेकर भीड़ आरोपितों को बांधकर पीटती है या फिर जान से मार डालती है।
विधेयक की प्रति सभी विधायकों के बीच सोमवार को वितरित कर दी गई थी। इस विधेयक के कानून बनने पर भीड़ हिंसा के दोषी व्यक्ति या व्यक्तियों को उम्र कैद तक की सजा सुनाई जा सकेगी। कानून में सजा के अलावा गवाह की सुरक्षा, पीड़ित पक्ष को मुआवजा जैसे कई प्रावधान किये गये हैं।
इसके अलावा जुर्माना के तौर पर 25 लाख रुपये तक वसूला जा सकेगा। इसके अलावा चल-अचल संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। इसके अलावा चालू सत्र में सरकार विद्युत शुल्क विधेयक, आदिवासी विश्वविद्यालय और वित्त विधेयक भी पेश करेगी।
बता दें कि झारखंड देश का ऐसा तीसरा राज्य है जहां मॉब लिंचिग की घटनाओं पर क़ाबू पाने के लिए क़ानून बनाया जाने वाला है।इस बिल में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आइजी (पुलिस महानिरीक्षक) स्तर के अधिकारी को राज्य का समन्वयक बनाए जाने का प्रावधान है, जो नोडल अफ़सर कहे जाएंगे। उन्हें महीने में कम से कम एक बार सभी ज़िलों के उन अधिकारियों के साथ बैठक करनी होगी, जिनपर ऐसी घटनाओं की रोकथाम या उनकी ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने का दायित्व होगा। हर ज़िले में एसपी या एसएसपी स्तर के अधिकारी ही को-ऑर्डिनेटर का काम करेंगे।












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